21 मार्च 2026 | 06:00 AM
RI News National Desk
नक्सलवाद खत्म 2026 अमित शाह — यही वह स्पष्ट लक्ष्य है जिसे केंद्र सरकार ने संसद में देश के सामने रखा है। गृह मंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में घोषणा करते हुए कहा कि भारत सरकार वर्ष 2026 तक नक्सलवाद को पूरी तरह समाप्त करने के लिए प्रतिबद्ध है।

संसद में अमित शाह का बड़ा बयान
देश की आंतरिक सुरक्षा को लेकर केंद्र सरकार ने एक निर्णायक संकेत दिया है। गृह मंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत सरकार का लक्ष्य वर्ष 2026 तक नक्सलवाद को पूरी तरह समाप्त करना है। यह बयान केवल एक राजनीतिक घोषणा नहीं बल्कि एक ठोस, समयबद्ध और रणनीतिक मिशन का संकेत देता है।
उन्होंने यह भी बताया कि पिछले कुछ वर्षों में नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सरकार को बड़ी सफलता मिली है, और अब यह लड़ाई अपने अंतिम चरण में प्रवेश कर चुकी है। सरकार अब “फाइनल पुश” देने की तैयारी में है, जिससे नक्सल नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त किया जा सके।
किन राज्यों पर है सबसे ज्यादा फोकस?
अमित शाह ने अपने भाषण में विशेष रूप से उन राज्यों का जिक्र किया जहां नक्सल गतिविधियां अभी भी सक्रिय हैं: – छत्तीसगढ़ (विशेष रूप से बस्तर क्षेत्र) – झारखंड – ओडिशा – महाराष्ट्र के कुछ सीमावर्ती इलाके
इन क्षेत्रों में सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ाई जा रही है और लगातार सर्च ऑपरेशन चलाए जा रहे हैं।
सरकार का मानना है कि यदि इन “कोर एरिया” को पूरी तरह सुरक्षित कर लिया जाए, तो नक्सलवाद स्वतः समाप्त हो जाएगा।
नई रणनीति: केवल गोली नहीं, विकास भी
पहले नक्सलवाद से निपटने के लिए मुख्य रूप से सैन्य कार्रवाई पर जोर दिया जाता था। लेकिन अब सरकार ने “Security + Development Model” अपनाया है।
इस नई रणनीति के प्रमुख पहलू हैं:
सुरक्षा ऑपरेशन: CRPF, COBRA और राज्य पुलिस की संयुक्त कार्रवाई
इन्फ्रास्ट्रक्चर: गांवों तक सड़क, मोबाइल नेटवर्क और बिजली पहुंचाना
रोजगार: स्थानीय युवाओं को सरकारी योजनाओं से जोड़ना
शिक्षा: स्कूल और स्किल डेवलपमेंट सेंटर खोलना
स्वास्थ्य: प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की संख्या बढ़ाना
इस मॉडल का उद्देश्य है कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों को पूरी तरह मुख्यधारा में लाया जाए।
पिछले 10 वर्षों में क्या बदलाव आया?
सरकार के अनुसार, पिछले एक दशक में नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में काफी प्रगति हुई है:
प्रभावित जिलों की संख्या में भारी कमी
हिंसक घटनाओं में गिरावट
कई शीर्ष नक्सली नेताओं का सरेंडर या एनकाउंटर
स्थानीय लोगों का सहयोग बढ़ा
इस बदलाव में आधुनिक तकनीक का भी बड़ा योगदान है, जैसे:
ड्रोन सर्विलांस
सैटेलाइट मैपिंग
बेहतर इंटेलिजेंस नेटवर्क
क्या अभी भी खतरा बाकी है?
हालांकि स्थिति में सुधार हुआ है, लेकिन पूरी तरह खतरा खत्म नहीं हुआ है।
मुख्य चुनौतियां:
घने जंगल और कठिन भौगोलिक परिस्थितियां
कुछ क्षेत्रों में नक्सलियों का स्थानीय समर्थन
वैचारिक स्तर पर उनकी पकड़
यही कारण है कि सरकार अब केवल सुरक्षा नहीं बल्कि “विश्वास निर्माण” पर भी जोर दे रही है।
विश्लेषण: क्या 2026 तक संभव है?
अमित शाह का यह बयान एक स्पष्ट समयसीमा तय करता है, जो इसे पहले की घोषणाओं से अलग बनाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि:
यदि सुरक्षा ऑपरेशन लगातार जारी रहे
विकास योजनाएं जमीन पर सही तरीके से लागू हों
स्थानीय लोगों का विश्वास जीता जाए
तो 2026 तक नक्सलवाद को काफी हद तक खत्म किया जा सकता है।
हालांकि, इसे पूरी तरह समाप्त करना एक जटिल प्रक्रिया है और इसमें समय और निरंतर प्रयास की आवश्यकता होगी।
आम जनता पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
इस अभियान का सबसे बड़ा फायदा उन लोगों को होगा जो दशकों से नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में रह रहे हैं:
सुरक्षा और शांति का माहौल बनेगा
उद्योग और निवेश के नए अवसर आएंगे
युवाओं को रोजगार मिलेगा
शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं बेहतर होंगी
इसके अलावा, पूरे देश की आंतरिक सुरक्षा भी मजबूत होगी, जो आर्थिक विकास के लिए बेहद जरूरी है।
निष्कर्ष
नक्सलवाद भारत के लिए एक लंबे समय से चुनौती रहा है। लेकिन इस बार सरकार ने इसे खत्म करने के लिए एक स्पष्ट लक्ष्य और समयसीमा तय की है।
अमित शाह का यह बयान दर्शाता है कि सरकार अब इस समस्या को अंतिम रूप से समाप्त करने के लिए प्रतिबद्ध है।
हालांकि सफलता केवल सैन्य कार्रवाई पर निर्भर नहीं करेगी, बल्कि यह इस बात पर भी निर्भर करेगी कि विकास और विश्वास की नीति कितनी प्रभावी ढंग से लागू होती है।
यदि दोनों पहलुओं में संतुलन बना रहा, तो 2026 तक नक्सलवाद का अंत केवल एक लक्ष्य नहीं बल्कि एक वास्तविकता बन सकता है।
