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मंगई क्षेत्र में 35 वर्षों से जलजमाव का संकट: किसान दिवस पर सीडीओ को सौंपा ज्ञापन, स्थायी समाधान की मांग

मंगई क्षेत्र में 35 वर्षों से जलजमाव का संकट: किसान दिवस पर सीडीओ को सौंपा ज्ञापन, स्थायी समाधान की मांग - Uncategorized

गाजीपुर-बलिया के करईल क्षेत्र का संकट— शारदा सहायक नहर के कृत्रिम प्रवाह से हजारों हेक्टेयर कृषि भूमि जलमग्न, रबी फसलों की बुवाई प्रभावित।

गाजीपुर (RiNews Bureau): किसान दिवस के अवसर पर गाजीपुर और बलिया जनपद के हजारों किसानों के जीवन को प्रभावित करने वाली दशकों पुरानी गंभीर समस्या एक बार फिर प्रशासनिक पटल पर उठाई गई है। सामाजिक कार्यकर्ता एवं किसान हितैषी मृत्युंजय राय (राजापुर) ने मुख्य विकास अधिकारी (CDO) आलोक प्रसाद को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपकर मंगई नदी में शारदा सहायक नहर का कृत्रिम पानी छोड़े जाने से उत्पन्न हो रही जलजमाव की समस्या, किसानों को हो रहे भारी आर्थिक नुकसान तथा नदी क्षेत्र में सक्रिय मत्स्य माफियाओं की अवैध गतिविधियों पर प्रभावी कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

सौपे गए ज्ञापन के अनुसार, पिछले लगभग 35 वर्षों से मंगई नदी में शारदा सहायक नहर का अतिरिक्त पानी अनियंत्रित तरीके से छोड़ा जा रहा है। इसके कारण गाजीपुर जनपद की मोहम्मदाबाद विधानसभा (378), जहूराबाद विधानसभा (377) तथा बलिया जनपद की फेफना विधानसभा (360) के अंतर्गत आने वाले करईल क्षेत्र की हजारों हेक्टेयर उपजाऊ कृषि भूमि रबी फसलों की बुवाई के मुख्य समय तक जलमग्न रहती है। किसानों ने इस स्थिति को एक गंभीर मानव निर्मित आपदा करार दिया है, जिसका कोई स्थायी तकनीकी समाधान अब तक नहीं खोजा जा सका है।

फसल चक्र का व्यवधान और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर चोट: एक विश्लेषण

इस संकट के कृषि-आर्थिक प्रभाव को रेखांकित करते हुए मृत्युंजय राय ने कहा कि प्राकृतिक नदियां मानसून की समाप्ति के बाद अपने सामान्य प्रवाह क्षेत्र में लौट जाती हैं, लेकिन मंगई नदी में कृत्रिम जलप्रवाह के कारण अक्टूबर, नवंबर और दिसंबर जैसे महत्वपूर्ण महीनों में खेतों में भारी जलभराव बना रहता है। परिणामस्वरूप, क्षेत्र के प्रगतिशील किसान समय पर गेहूं, चना, मसूर और सरसों जैसी प्रमुख रबी फसलों की बुवाई करने से वंचित रह जाते हैं।

विलंब से की गई बुवाई के कारण फसलों को वानस्पतिक विकास (Vegetative Growth) के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल पाता। मार्च और अप्रैल के महीनों में अचानक बढ़ते तापमान और बदलते मौसम के कारण फसलों में फूल आने के समय ही वे झड़ जाते हैं और फलियों में दानों का विकास रुक जाता है। इस बार-बार होने वाले नुकसान ने क्षेत्र के किसानों को गहरे कर्ज के जाल में धकेल दिया है, जिससे युवाओं का कृषि से मोहभंग हो रहा है और तेजी से पलायन बढ़ रहा है।

मत्स्य माफियाओं की नाकेबंदी और प्रशासनिक आश्वासन

ज्ञापन में इस बात पर भी गहरी चिंता व्यक्त की गई कि किसानों द्वारा निरंतर आवाज उठाए जाने के बावजूद आज तक प्रशासन द्वारा इस जलभराव का कोई वैज्ञानिक अध्ययन या सर्वेक्षण नहीं कराया गया। इसके अतिरिक्त, मानसून के दौरान बढ़े जलस्तर का अनुचित लाभ उठाकर कुछ स्थानीय मत्स्य माफिया नदी के प्राकृतिक बहाव को अवैध बांध और जाल लगाकर अवरुद्ध कर देते हैं, जिससे जलनिकासी की समस्या और अधिक विकराल रूप ले लेती है। किसानों ने ऐसे असमाजिक तत्वों को चिन्हित कर उनके विरुद्ध धारा 107/116 के तहत पाबंद करने और कठोर कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है।

प्रभावित क्षेत्र / विधानसभासंकट का मुख्य कारणकृषि एवं आर्थिक प्रभाव
मोहम्मदाबाद (378) व जहूराबाद (377), गाजीपुरशारदा सहायक नहर का अतिरिक्त जलप्रवाह एवं मत्स्य माफियाओं द्वारा किया जाने वाला अवैध बांधन।अक्टूबर से दिसंबर तक खेतों का जलमग्न रहना, रबी फसलों (गेहूं, सरसों) की देर से बुवाई, उत्पादन में भारी गिरावट और बढ़ता कर्ज।
फेफना (360), बलिया (करईल क्षेत्र)

मुख्य विकास अधिकारी आलोक प्रसाद ने प्रतिनिधिमंडल की बातों को ध्यानपूर्वक सुना और ज्ञापन प्राप्त कर आश्वस्त किया कि सिंचाई विभाग, राजस्व विभाग और स्थानीय प्रशासन के समन्वय से इस पूरे मामले की कड़ाई से जांच कराई जाएगी और जलनिकासी व्यवस्था को सुदृढ़ करने के आवश्यक निर्देश जारी किए जाएंगे।

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आधिकारिक स्रोत एवं लाइव नीतिगत संदर्भ:
यह समाचार रिपोर्ट गाजीपुर विकास भवन में आयोजित किसान दिवस बैठक की आधिकारिक कार्यवाही, पीड़ित किसानों के प्रतिनिधिमंडल द्वारा सौंपे गए आधिकारिक ज्ञापन और स्थानीय फील्ड इनपुट्स पर आधारित है।


स्रोतः आरआई न्यूज फीड नेटवर्क (एकीकृत) | संपादक मंडल: आरआई न्यूज डेस्क (RI News Desk)

📅 प्रकाशित तिथि: 17 Jun 2026 को 09:10 PM बजे | गाजीपुर, उत्तर प्रदेश

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