
— RI News National Desk
03 मार्च 2026
ईरान संकट पर भारत की कूटनीति और कांग्रेस का हमला
नई दिल्ली / वेस्ट एशिया — पश्चिम एशिया में ईरान से जुड़े बढ़ते तनाव के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान, बहरीन के किंग और अन्य गल्फ देशों के शीर्ष नेताओं से बातचीत की। प्रधानमंत्री ने क्षेत्र में हालिया हमलों पर चिंता जताते हुए संवाद और कूटनीति को ही समाधान का मार्ग बताया और वहां रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी।
सरकारी स्तर पर यह स्पष्ट किया गया कि भारत किसी भी प्रकार की हिंसा के पक्ष में नहीं है और क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखना सभी देशों के साझा हित में है। भारत ने संयम, बातचीत और राजनयिक प्रयासों के ज़रिये संकट कम करने की अपील दोहराई है।
एमकेडी व्योम टैंकर हमला: पहला भारतीय हताहत
इस संकट के बीच ओमान तट के पास ऑयल टैंकर एमकेडी व्योम पर हुए हमले में एक भारतीय नाविक की मौत की पुष्टि हुई है। भारतीय दूतावास ने मृतक के परिजनों से संपर्क स्थापित कर आवश्यक सहायता और शव स्वदेश लाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह घटना मौजूदा संकट में भारत से जुड़ी पहली दर्ज जनहानि मानी जा रही है।
कांग्रेस का आरोप: विदेश नीति पर सवाल
विपक्षी कांग्रेस ने ईरान संकट पर सरकार की प्रतिक्रिया को लेकर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि मोदी सरकार की प्रतिक्रिया कमजोर और अस्पष्ट रही। राहुल गांधी ने इसे भारत की विदेश नीति की विफलता बताते हुए कहा कि वैश्विक संकट के समय भारत की भूमिका प्रभावी रूप से सामने नहीं आ पाई।
विश्लेषण
भारत की कूटनीतिक रणनीति स्पष्ट रूप से संतुलन पर आधारित दिखाई देती है। गल्फ क्षेत्र भारत के लिए ऊर्जा आपूर्ति, व्यापार और करोड़ों प्रवासी भारतीयों के कारण अत्यंत संवेदनशील है। ऐसे में भारत टकराव से दूरी बनाकर संवाद और स्थिरता पर ज़ोर दे रहा है। वहीं विपक्ष इस संतुलन को राजनीतिक मुद्दा बनाकर सरकार की विदेश नीति पर सवाल उठा रहा है।
प्रभाव
- पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने से कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और महंगाई का खतरा।
- गल्फ देशों में रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा पर सरकार का विशेष फोकस।
- विदेश नीति को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव तेज।
- हवाई सेवाओं और दूतावास स्तर पर राहत व सतर्कता उपाय सक्रिय।
