
— Saranash Kumar | National & Business Correspondent, Lucknow
मिडिल ईस्ट में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच हॉर्मुज स्ट्रेट संकट को लेकर वैश्विक ऊर्जा बाजार में चिंता गहराती जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इस रणनीतिक समुद्री मार्ग में व्यवधान बढ़ता है तो दुनिया भर में तेल और गैस की आपूर्ति पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। भारत जैसे देशों के लिए यह स्थिति विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि देश अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयातित तेल और गैस से पूरा करता है।
हॉर्मुज स्ट्रेट फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच स्थित एक संकीर्ण समुद्री मार्ग है, जिसे दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा परिवहन मार्गों में गिना जाता है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसियों के अनुसार वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग एक बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुजरता है। ऐसे में यहां किसी भी प्रकार का सैन्य या राजनीतिक संकट सीधे ऊर्जा बाजार को प्रभावित कर सकता है।
क्यों महत्वपूर्ण है हॉर्मुज स्ट्रेट
हॉर्मुज स्ट्रेट के माध्यम से सऊदी अरब, इराक, कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात और कतर जैसे देशों से तेल और गैस दुनिया के विभिन्न हिस्सों में पहुंचाई जाती है। यही कारण है कि इस मार्ग को वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
यदि हॉर्मुज स्ट्रेट संकट के कारण समुद्री यातायात बाधित होता है तो तेल टैंकरों की आवाजाही प्रभावित हो सकती है। इससे ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान उत्पन्न हो सकता है और वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिल सकता है।
ऊर्जा बाजार में बढ़ी अस्थिरता
मिडिल ईस्ट में बढ़ते सैन्य तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पहले से ही दबाव में है। कई विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह संकट और गहराता है तो तेल की कीमतों में अचानक वृद्धि हो सकती है।
तेल की कीमतों में तेजी का असर केवल ऊर्जा क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका प्रभाव परिवहन लागत, औद्योगिक उत्पादन और उपभोक्ता महंगाई पर भी पड़ता है। यही कारण है कि हॉर्मुज स्ट्रेट संकट को वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर जोखिम के रूप में देखा जा रहा है।
भारत के लिए क्या मायने
भारत दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातक देशों में से एक है। देश अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया से आयात करता है। इसलिए यदि हॉर्मुज स्ट्रेट के जरिए होने वाली तेल आपूर्ति प्रभावित होती है तो भारत में ईंधन कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार हॉर्मुज स्ट्रेट संकट के चलते भारत में कुकिंग गैस, पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि की संभावना बन सकती है। इससे घरेलू महंगाई और परिवहन लागत दोनों प्रभावित हो सकते हैं।
हालांकि भारत ने पिछले कुछ वर्षों में ऊर्जा स्रोतों को विविध बनाने की रणनीति अपनाई है। रूस और अन्य देशों से तेल आयात बढ़ाने के प्रयास इसी दिशा में उठाए गए कदम हैं।
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर संभावित असर
ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह संकट लंबे समय तक जारी रहता है तो वैश्विक अर्थव्यवस्था पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। ऊर्जा कीमतों में वृद्धि से कई देशों में आर्थिक दबाव बढ़ सकता है और औद्योगिक उत्पादन लागत भी प्रभावित हो सकती है।
विश्लेषण: विशेषज्ञों का मानना है कि हॉर्मुज स्ट्रेट संकट केवल क्षेत्रीय राजनीतिक तनाव का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ा हुआ विषय है। यदि इस मार्ग में व्यवधान आता है तो इसका प्रभाव पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
प्रभाव: यदि हॉर्मुज स्ट्रेट संकट और गहराता है तो वैश्विक तेल कीमतों में तेज वृद्धि हो सकती है। इससे भारत जैसे आयात-निर्भर देशों में महंगाई बढ़ सकती है और ऊर्जा लागत का दबाव अर्थव्यवस्था पर महसूस किया जा सकता है।
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