
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा उत्तर प्रदेश को “फियर ज़ोन” से “फेथ ज़ोन” में बदलने का दावा केवल कानून-व्यवस्था से जुड़ा बयान नहीं है, बल्कि यह राज्य के सामाजिक और प्रशासनिक भरोसे से जुड़ा एक बड़ा कथन है। इस दावे का मूल अर्थ अपराध के आंकड़ों से अधिक नागरिकों के मन में पैदा हुए विश्वास और सुरक्षा की भावना से जुड़ा है।
वर्ष 2012 से पहले और 2017 तक के दौर में उत्तर प्रदेश की छवि भय, अराजकता और अस्थिरता से जुड़ी रही। दंगे, कर्फ्यू, संगठित अपराध और कमजोर प्रशासनिक प्रतिक्रिया ने आम नागरिकों में यह धारणा बना दी थी कि राज्य में कानून से अधिक प्रभाव बाहुबल और राजनीतिक संरक्षण का है। इसी माहौल ने उत्तर प्रदेश को लंबे समय तक “फियर ज़ोन” के रूप में पहचान दिलाई।
2017 के बाद सत्ता में आई योगी सरकार ने शासन की प्राथमिकता को स्पष्ट रूप से बदला। माफिया और अपराधियों के खिलाफ खुली कार्रवाई, पुलिस को राजनीतिक संरक्षण से मुक्त करने का दावा, धार्मिक आयोजनों और सार्वजनिक कार्यक्रमों में बेहतर सुरक्षा व्यवस्था तथा प्रशासनिक सख्ती को सरकार ने भरोसे के निर्माण का आधार बताया। इसका उद्देश्य केवल अपराध नियंत्रण नहीं, बल्कि नागरिकों के मन से भय निकालकर विश्वास स्थापित करना था।
यहीं से “फेथ ज़ोन” की अवधारणा सामने आती है। सरकार के अनुसार आज उत्तर प्रदेश में लोग त्योहार मनाने, रात में यात्रा करने और सार्वजनिक स्थलों पर जाने को लेकर पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित महसूस करते हैं। बड़े धार्मिक आयोजन बिना बड़े दंगों के संपन्न होना सरकार के लिए इसी विश्वास का प्रमाण है।
हालाँकि यह विश्वास पूर्ण और निर्विवाद नहीं है। हाल के वर्षों में अदालत परिसरों को बम धमकी, सड़क हादसों में बढ़ती मौतें और स्थानीय स्तर पर होने वाली आपराधिक घटनाएँ यह संकेत देती हैं कि भय पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। फर्क यह है कि पहले भय अराजकता से जुड़ा था, जबकि अब यह अधिकतर प्रशासनिक और सुरक्षा चूक से जुड़ा दिखाई देता है।
“फेथ ज़ोन” का सही अर्थ केवल धार्मिक सुरक्षा या कठोर पुलिसिंग नहीं हो सकता। वास्तविक विश्वास तब बनता है जब नागरिक को यह भरोसा हो कि न्यायिक संस्थान सुरक्षित हैं, कानून सभी के लिए समान है और प्रशासन संकट की स्थिति में तुरंत और निष्पक्ष रूप से कार्य करेगा। इस कसौटी पर उत्तर प्रदेश में प्रगति तो हुई है, लेकिन मंज़िल अभी दूर है।
इस प्रकार “फियर ज़ोन से फेथ ज़ोन” का दावा न तो पूरी तरह खोखला है और न ही पूर्ण सत्य। यह एक परिवर्तनशील प्रक्रिया को दर्शाता है, जिसमें राज्य भय के पुराने दौर से निकल चुका है, लेकिन स्थायी और व्यापक विश्वास की स्थापना अभी भी एक जारी चुनौती है। आने वाले वर्षों में यही तय करेगा कि उत्तर प्रदेश वास्तव में “फेथ ज़ोन” बन पाया या यह केवल एक राजनीतिक प्रतीक बनकर रह गया।
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— Saranash Kumar | National & Business Correspondent, Lucknow
Date: 14 फ़रवरी 2026
