
CBSE की मूल्यांकन प्रणाली पर बढ़ा विवाद, छात्रों और शिक्षकों ने उठाए गंभीर सवाल
नई दिल्ली, 1 जून 2026: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) आधारित मूल्यांकन प्रणाली एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गई है। देश के विभिन्न हिस्सों से छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों ने मूल्यांकन प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं, अंकन में असंगतियों तथा पारदर्शिता की कमी को लेकर चिंता व्यक्त की है। हाल के दिनों में इस मुद्दे ने इतना तूल पकड़ लिया कि कई छात्र संगठनों और शिक्षा से जुड़े समूहों ने बोर्ड से स्पष्टीकरण और सुधारात्मक कदम उठाने की मांग की है।
क्या है पूरा विवाद?
CBSE पिछले कुछ वर्षों से उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के लिए ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली का उपयोग कर रहा है। इस प्रणाली में परीक्षकों को डिजिटल रूप से स्कैन की गई उत्तर पुस्तिकाएं उपलब्ध कराई जाती हैं, जिनका मूल्यांकन ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से किया जाता है। बोर्ड का दावा है कि इससे मूल्यांकन प्रक्रिया तेज, सुरक्षित और अधिक पारदर्शी बनती है।
हालांकि इस वर्ष कई छात्रों और शिक्षकों ने आरोप लगाया है कि कुछ विषयों में अपेक्षा से कम अंक दिए गए हैं तथा समान गुणवत्ता वाले उत्तरों को अलग-अलग अंक प्राप्त हुए हैं। इससे मूल्यांकन की निष्पक्षता और एकरूपता पर सवाल खड़े हुए हैं।
छात्र संगठनों का विरोध
परिणाम घोषित होने के बाद विभिन्न छात्र संगठनों ने CBSE मुख्यालय और क्षेत्रीय कार्यालयों के बाहर विरोध प्रदर्शन किए। छात्रों का कहना है कि कई मामलों में प्राप्तांक उनकी शैक्षणिक क्षमता और पूर्व प्रदर्शन से मेल नहीं खाते।
कुछ अभ्यर्थियों ने यह भी दावा किया कि पुनर्मूल्यांकन और उत्तर पुस्तिका की प्रतिलिपि प्राप्त करने की प्रक्रिया जटिल और समय लेने वाली है। उनका मानना है कि छात्रों को अपनी उत्तर पुस्तिकाओं और मूल्यांकन प्रक्रिया के बारे में अधिक जानकारी उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
शिक्षकों ने भी जताई चिंता
कई शिक्षकों और मूल्यांकनकर्ताओं ने भी ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली की कुछ व्यावहारिक चुनौतियों की ओर ध्यान आकर्षित किया है। उनका कहना है कि डिजिटल स्क्रीन पर लंबे समय तक उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन करने से थकान बढ़ सकती है, जिसका प्रभाव अंकन की गुणवत्ता पर पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बड़ी संख्या में उत्तर पुस्तिकाओं का कम समय में मूल्यांकन करने का दबाव भी परीक्षकों के सामने एक चुनौती बन सकता है। हालांकि बोर्ड का कहना है कि मूल्यांकन प्रक्रिया में गुणवत्ता नियंत्रण और मॉडरेशन के कई स्तर मौजूद हैं।
CBSE का पक्ष
CBSE अधिकारियों का कहना है कि ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप विकसित की गई है और इसमें त्रुटियों की संभावना को न्यूनतम करने के लिए कई तकनीकी उपाय किए गए हैं। बोर्ड के अनुसार प्रत्येक परीक्षक को विस्तृत दिशानिर्देश, प्रशिक्षण और मूल्यांकन मानक उपलब्ध कराए जाते हैं।
बोर्ड का यह भी दावा है कि डिजिटल प्रणाली के माध्यम से उत्तर पुस्तिकाओं की सुरक्षा बढ़ी है और किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ या मानवीय हस्तक्षेप की संभावना कम हुई है।
नई शिक्षा व्यवस्था पर प्रभाव
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि CBSE देश के सबसे बड़े शिक्षा बोर्डों में से एक है और इसकी मूल्यांकन प्रणाली पर करोड़ों छात्रों का भविष्य निर्भर करता है। ऐसे में किसी भी प्रकार का विवाद केवल परीक्षा परिणामों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में विश्वास को भी प्रभावित कर सकता है।
नई शिक्षा नीति (NEP) के तहत निरंतर और समग्र मूल्यांकन, कौशल आधारित शिक्षा तथा पारदर्शिता पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसलिए मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर उठ रहे सवालों का समय पर समाधान आवश्यक माना जा रहा है।
विशेषज्ञ क्या सुझाव दे रहे हैं?
शिक्षा विशेषज्ञों का सुझाव है कि CBSE को मूल्यांकन प्रक्रिया में और अधिक पारदर्शिता लानी चाहिए। उत्तर पुस्तिकाओं की डिजिटल प्रतियां उपलब्ध कराने, पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया को सरल बनाने तथा मूल्यांकन मानकों की स्पष्ट जानकारी देने से छात्रों का विश्वास बढ़ सकता है।
इसके अलावा परीक्षकों के प्रशिक्षण, तकनीकी सुधार और स्वतंत्र ऑडिट जैसी व्यवस्थाओं को भी मजबूत करने की मांग उठ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीक और मानवीय मूल्यांकन के बीच बेहतर संतुलन स्थापित करना समय की आवश्यकता है।
आगे क्या?
CBSE मूल्यांकन प्रणाली को लेकर उठे विवाद के बाद बोर्ड की ओर से स्थिति की समीक्षा किए जाने की संभावना है। यदि आवश्यक हुआ तो मूल्यांकन प्रक्रिया और पुनर्मूल्यांकन तंत्र में सुधार के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए जा सकते हैं।
फिलहाल छात्र, अभिभावक और शिक्षक बोर्ड की अगली प्रतिक्रिया का इंतजार कर रहे हैं। आने वाले दिनों में यह मुद्दा शिक्षा जगत में महत्वपूर्ण चर्चा का विषय बना रह सकता है।
विश्लेषण
CBSE की ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली आधुनिक तकनीक पर आधारित एक महत्वपूर्ण पहल है, लेकिन किसी भी मूल्यांकन व्यवस्था की सफलता छात्रों और शिक्षकों के विश्वास पर निर्भर करती है। यदि पारदर्शिता, जवाबदेही और गुणवत्ता नियंत्रण को और मजबूत किया जाता है तो यह प्रणाली देश की शिक्षा व्यवस्था के लिए एक प्रभावी मॉडल बन सकती है। वहीं उठ रहे सवालों की अनदेखी भविष्य में और बड़े विवादों को जन्म दे सकती है।
स्रोत: The Hindu
प्रकाशन समय: 1 जून 2026 | 07:00 AM IST
— RI News Desk



