ढाका: ब्रसेल्स स्थित think tank International Crisis Group (ICG) ने भारत-बांग्लादेश संबंधों पर एक व्यापक रिपोर्ट जारी की है, जिसमें कहा गया है कि दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव का असर द्विपक्षीय रिश्तों, राजनीतिक संवाद और क्षेत्रीय स्थिरता पर पड़ा है। रिपोर्ट ने यह भी सुझाया है कि भारत को बांग्लादेश के सभी राजनीतिक पक्षों के साथ बेहतर कूटनीतिक संवाद स्थापित करना चाहिए।
ICG रिपोर्ट में क्या कहा गया?
ICG की रिपोर्ट में उल्लेख है कि वर्षों से भारत का भरोसा यह रहा है कि बांग्लादेश के साथ मजबूत संबंध केवल Awami League के सत्ता में रहने पर ही संभव हैं। यह धारणा, रिपोर्ट के अनुसार, बांग्लादेश की घरेलू राजनीति में विभाजन और दोहरे संदेश का कारण बनी है, जिससे संबंधों में तनाव बढ़ा है। रिपोर्ट ने सुझाव दिया है कि नई दिल्ली को बांग्लादेश के सभी राजनीतिक समूहों के साथ जुड़कर एक संतुलित नीति अपनानी चाहिए।
राजनीतिक तनाव के कारण
बांग्लादेश में राजनीतिक उथल-पुथल और हाल के दिनों में विरोध प्रदर्शनों ने भारत-बांग्लादेश संबंधों को प्रभावित किया है। ढाका-नई दिल्ली के बीच कूटनीतिक बयानबाज़ी और आरोप-प्रत्यारोप के कारण तनाव और गहरा गया है, जिससे दोनों देशों के राजनयिक संवाद पर अस्थिरता आई है।
विशेषज्ञों का विश्लेषण
विश्लेषकों के अनुसार, भारत-बांग्लादेश संबंधों में चली आ रही समस्याओं का मुख्य कारण यह रहा है कि कूटनीतिक दृष्टिकोण में एकतरफा भरोसे का माहौल बना, जो दोनों देशों के राजनीतिक भूगोल को सही ढंग से नहीं समझ पाया। रिपोर्ट में यह भी संकेत दिया गया है कि चुनावों के बाद राजनीतिक बदलाव के अवसर पर दोनों देशों को आपसी भरोसे और सहयोग को पुनः स्थापित करने का मौका मिला है।
प्रभाव
यह रिपोर्ट यह बताती है कि द्विपक्षीय तनाव का असर सिर्फ राजनयिक संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि कारोबार, सीमा सुरक्षा, जनता-जनता संपर्क और क्षेत्रीय सहयोग जैसे मुद्दों पर भी महत्वपूर्ण प्रभाव डालता है। विश्लेषकों के अनुसार, दोनों देश यदि संतुलित और सहयोगात्मक नीति अपनाएँ तो संभावित तनावों को कम किया जा सकता है।
Desk: RI News Desk
Active Source:
International Crisis Group

