चंदनी पब्लिक स्कूल, सुरतापुर में बालमेले “मिलन” का भव्य आयोजन

— Awanish Kumar Rai | Bureau Chief, Ghazipur | 16 फरवरी 2026 

चंदनी पब्लिक स्कूल सुरतापुर में बालमेला “मिलन”

सुरतापुर। चंदनी पब्लिक स्कूल, सुरतापुर में बच्चों की रचनात्मकता, कौशल और आत्मविश्वास को मंच प्रदान करने के उद्देश्य से बालमेले “मिलन” का भव्य आयोजन किया गया। मेले का शुभारंभ विद्यालय के प्रबंधक दयाशंकर राय ने फीता काटकर किया। उद्घाटन के साथ ही विद्यालय परिसर उत्साह, उमंग और बालसुलभ चहल-पहल से भर उठा।

चंदनी पब्लिक स्कूल सुरतापुर में बालमेला मिलन का उद्घाटन करते प्रबंधक दयाशंकर राय
चंदनी पब्लिक स्कूल, सुरतापुर में बालमेले “मिलन” का उद्घाटन करते प्रबंधक दयाशंकर राय।

बालमेले में विद्यार्थियों ने हस्तकला एवं पाककला का आकर्षक और जीवंत प्रदर्शन प्रस्तुत किया। बच्चों द्वारा लगाए गए स्टॉलों पर कस्टर्ड, चाय, झालमूढ़ी, आलूकाटा, मोमोज, पानीपुरी, चाउमीन सहित अनेक प्रकार के नाश्तों की दुकानों ने मेले को वास्तविक बाजार का स्वरूप प्रदान किया।

इसके अतिरिक्त बालगेम, क्वाइन गेम, डिसलोकेट गेम और इलेक्ट्रॉनिक पहेली गेम जैसी मनोरंजक गतिविधियों ने बच्चों और अभिभावकों—दोनों का भरपूर ध्यान आकर्षित किया।

बालमेला मिलन में बच्चों द्वारा नाश्ते का स्टॉल संचालित करते विद्यार्थी
नाश्ते के स्टॉल पर ग्राहकों को सामग्री उपलब्ध कराते विद्यार्थी।

नाश्ते के स्टॉलों पर बच्चों ने स्वयं ग्राहकों से संवाद किया, सामग्री बेची और मोलभाव किया। अभिभावकों ने भी ग्राहक बनकर बच्चों का उत्साह बढ़ाया। इस प्रक्रिया में बच्चों ने व्यावसायिक दक्षता, व्यवहारिक ज्ञान और आत्मनिर्भरता का सजीव परिचय दिया, जिससे पूरा मेला शिक्षाप्रद और आनंदमय बन गया।


विश्लेषण

बालमेला “मिलन” केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि अनुभव आधारित शिक्षा का सशक्त उदाहरण रहा। कक्षा-कक्ष की सैद्धांतिक पढ़ाई से इतर बच्चों को वास्तविक जीवन की परिस्थितियों—जैसे बिक्री, संवाद, सहयोग और निर्णय—से रूबरू होने का अवसर मिला।

विद्यालय के निदेशक नवीन राय ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि ऐसे आयोजन बच्चों में नेतृत्व क्षमता, व्यवहारिक समझ और व्यावसायिक सोच विकसित करने में सहायक होते हैं। उन्होंने कहा कि मेला बच्चों को केवल सीखने का अवसर ही नहीं देता, बल्कि उनमें आपसी समन्वय और आत्मविश्वास भी पैदा करता है।


प्रभाव

इस बालमेले का सबसे बड़ा प्रभाव यह रहा कि बच्चों ने शिक्षा को पुस्तकों की सीमा से बाहर निकलकर जीवनोपयोगी कौशल के रूप में अनुभव किया। मोलभाव, ग्राहक से व्यवहार, समय प्रबंधन और टीमवर्क जैसे गुण बच्चों के व्यक्तित्व विकास में दीर्घकालिक भूमिका निभाते हैं।

ऐसे आयोजनों से यह संदेश भी जाता है कि विद्यालय केवल परीक्षा-केंद्रित नहीं, बल्कि बच्चों के समग्र विकास के लिए प्रतिबद्ध हैं। बालमेला “मिलन” निश्चित रूप से विद्यार्थियों के स्मरणीय अनुभवों में एक महत्वपूर्ण अध्याय बनकर जुड़ा।


कार्यक्रम में उपप्रधानाचार्य विनय राय, विजयशंकर राय, माधव सरकार, दिवाकर राय, आशुतोष राय, प्रीति कुमारी, मिसकात, यूसुफ, झुल्लन सहित विद्यालय के शिक्षकगण एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

आगंतुकों का स्वागत प्रधानाचार्य प्रवीण पीयूष राय ने किया।

— RI News

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