भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा आर्थिक विकास को लेकर सकारात्मक संकेत दिए जाने से बाजार में निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ है। बैंकिंग और फाइनेंशियल सेक्टर में स्थिरता के संकेत मिले हैं।
घरेलू शेयर बाजार में सीमित उतार-चढ़ाव के बीच आईटी और फार्मा शेयरों में चुनिंदा खरीदारी देखी गई, जबकि मेटल और रियल एस्टेट सेक्टर दबाव में रहे।
कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में भू-राजनीतिक तनाव के कारण अस्थिरता बनी हुई है, जिसका असर पेट्रोल–डीजल की कीमतों और परिवहन लागत पर पड़ सकता है।
सरकार द्वारा खाद्य वस्तुओं और खाद्य तेलों की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए आयात और भंडारण नीति पर नजर रखी जा रही है, ताकि महंगाई पर काबू पाया जा सके।
डिजिटल पेमेंट और UPI ट्रांजैक्शन में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है, जिससे फिनटेक कंपनियों और डिजिटल अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है।
MSME सेक्टर के लिए कर्ज सुविधा और सरकारी योजनाओं के विस्तार पर सरकार और बैंकों के बीच चर्चा तेज हुई है, जिससे छोटे कारोबारियों को राहत मिल सकती है।
कॉर्पोरेट जगत में विलय और अधिग्रहण से जुड़े कई बड़े सौदों पर बातचीत चल रही है, खासतौर पर टेक और मीडिया सेक्टर में गतिविधि तेज है।
निर्यात क्षेत्र में रुपये की स्थिति और वैश्विक मांग को लेकर व्यापारियों की निगाहें अंतरराष्ट्रीय बाजार पर टिकी हैं, जिससे एक्सपोर्ट रणनीति प्रभावित हो सकती है।
ई-कॉमर्स और रिटेल सेक्टर में त्योहारी सीजन के बाद बिक्री के आंकड़ों का विश्लेषण जारी है, कंपनियां अब न्यू ईयर सेल की तैयारी में जुट गई हैं।
वैश्विक स्तर पर अमेरिका, यूरोप और एशिया की अर्थव्यवस्थाओं से जुड़े संकेत भारतीय बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
