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- JEE Main 2026 Session-1: परीक्षा 21–30 जनवरी 2026 – अब अंतिम revision phase।
- UPSC CSE 2025 Interview: 8–19 दिसंबर 2025 – व्यक्तित्व परीक्षण की तैयारी पर ध्यान।
- UP LT Grade Teacher, Railway, TNPSC: हज़ारों पदों के लिए परीक्षाएँ 2025–26 में प्रस्तावित।
व्यापार समाचार

RBI नीति से पहले शेयर बाज़ार में सतर्क रुख, रुपये की कमजोरी ने बढ़ाई चिंता
RI BUSINESS DESK | मुंबई | 5 दिसंबर 2025
भारतीय शेयर बाज़ार आज RBI की मौद्रिक नीति घोषणा से ठीक पहले सतर्क रुख के साथ कारोबार कर रहा है।
Gift Nifty और एशियाई बाज़ारों के संकेतों के आधार पर शुरुआती सत्र में हल्की बढ़त–गिरावट देखी गई,
जबकि निवेशक इस बात का इंतज़ार कर रहे हैं कि क्या RBI रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की कटौती करेगा
या फिलहाल यथास्थिति बनाए रखेगा। इस बीच रुपया पिछले दिनों में कमजोर हुआ है, जिसका असर आयात बिल और
विदेशी निवेशकों के sentiment पर दिख रहा है।
RI NEWS विश्लेषण:
यदि RBI दरों को स्थिर रखता है तो बाज़ार इसे सतर्क लेकिन सुरक्षित रुख के रूप में देख सकता है,
जबकि मामूली कटौती से बैंकिंग और रियल्टी जैसे सेक्टरों में अल्पकालिक तेजी संभव है। छोटे निवेशकों के लिए
महत्वपूर्ण बात यह है कि वे केवल अफवाहों और एक दिन की सुर्खियों के आधार पर निर्णय न लें, बल्कि
लंबी अवधि के लक्ष्य, SIP और diversified पोर्टफोलियो पर ध्यान बनाए रखें – खासकर तब जब रुपया कमजोर हो
और वैश्विक माहौल अनिश्चित हो।
व्यापार समाचार

8.2% GDP ग्रोथ के साथ भी इन्फ्रा पर खर्च 4.6% तक सीमित, नीति निर्माण के लिए डेटा की कमी बड़ी चिंता
RI BUSINESS DESK | नीति विश्लेषण | 5 दिसंबर 2025
ताज़ा आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में भारत की वास्तविक GDP 8.2%
की तेज़ दर से बढ़ी है, जो वैश्विक स्तर पर सबसे तेज़ ग्रोथ में से एक है। लेकिन इन्फ्रास्ट्रक्चर निवेश
पर आए एक विश्लेषण के मुताबिक कुल निवेश घटकर GDP के लगभग 4.6% के आसपास सिमट गया है, जबकि विशेषज्ञ
मानते हैं कि तेज़ और टिकाऊ विकास के लिए यह स्तर कम से कम 7–8% होना चाहिए। समस्या यह है कि
इन्फ्रा-निवेश पर भरोसेमंद, समय पर और public डेटा की कमी के कारण नीति निर्माण और long-term planning
दोनों मुश्किल हो जाते हैं।
RI NEWS विश्लेषण:
सड़क, रेल, लॉजिस्टिक्स, हरित ऊर्जा, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में मजबूत ढाँचा बनाए बिना
8% के आसपास की विकास दर लंबे समय तक टिकाना कठिन होगा। निवेशकों और आम नागरिकों दोनों के लिए यह समझना
ज़रूरी है कि इन्फ्रा पर खर्च केवल “प्रोजेक्ट” नहीं, बल्कि रोज़गार, उत्पादकता और महँगाई – तीनों पर
सीधा असर डालता है। सरकार के लिए अगला कदम यह होना चाहिए कि वह पारदर्शी डेटा के साथ medium और
long-term इन्फ्रा रोडमैप रखे, ताकि private sector भी आत्मविश्वास के साथ निवेश बढ़ा सके।
व्यापार समाचार

MSME को सस्ती और तेज़ पूँजी: नई क्रेडिट स्कीम और डिजिटल मॉडल से छोटे कारोबारों को सहारा
RI BUSINESS DESK | भारत | 5 दिसंबर 2025
सरकार और वित्तीय संस्थानों ने माइक्रो, स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइज़ (MSME) सेक्टर के लिए हाल के महीनों
में कई नए कदम उठाए हैं। डिजिटल क्रेडिट असेसमेंट मॉडल, माइक्रो एंटरप्राइज़ कार्ड, समय पर भुगतान की निगरानी
और क्रेडिट गारंटी सीमा बढ़ाने जैसे उपायों का लक्ष्य यह है कि छोटे व्यवसायों को बिना जटिल कागज़ी प्रक्रिया के
तेजी से working capital मिल सके। सड़क विक्रेताओं और छोटे दुकानदारों के लिए collateral-free ऋण,
UPI–लिंक्ड RuPay credit card और डिजिटल भुगतान पर प्रोत्साहन जैसी पहलें भी इसी कड़ी का हिस्सा हैं।
RI NEWS विश्लेषण:
भारत की अर्थव्यवस्था में MSME सेक्टर रोज़गार और उत्पादन का बड़ा आधार है, लेकिन बैंक लोन, गारंटी और
कागज़ी formalities के कारण सबसे अधिक संघर्ष भी इन्हीं को करना पड़ता है। अगर नई स्कीमें ज़मीनी स्तर पर
पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से लागू होती हैं, तो यह न केवल छोटे कारोबारियों की नकदी समस्या हल कर सकती हैं,
बल्कि युवाओं और महिलाओं के लिए entrepreneurship के नए दरवाज़े भी खोल सकती हैं। साथ ही, जरूरी है कि
ब्याज दरें वाजिब हों और repayment नियम मानव–केन्द्रित हों, ताकि ऋण मदद बने, बोझ नहीं।