राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल ने संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से महत्वपूर्ण मुलाकात की। इस बैठक में पश्चिम एशिया की मौजूदा तनावपूर्ण स्थिति, ऊर्जा सुरक्षा और द्विपक्षीय संबंधों पर विस्तृत चर्चा हुई।
विस्तृत विश्लेषण: मुलाकात अबू धाबी में हुई। दोनों नेताओं ने इजराइल-ईरान तनाव, लाल सागर में हो रही समस्याओं और क्षेत्रीय सुरक्षा पर गहरी चर्चा की। अजित डोभाल ने भारत की चिंताओं से अवगत कराया कि पश्चिम एशिया में अस्थिरता भारत की ऊर्जा आपूर्ति और ९० लाख भारतीयों की सुरक्षा को प्रभावित कर सकती है।
UAE राष्ट्रपति ने भारत के साथ रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने का आश्वासन दिया। दोनों पक्षों ने Comprehensive Strategic Partnership को नई ऊंचाई देने पर सहमति जताई। व्यापार, निवेश, रक्षा सहयोग और आतंकवाद विरोधी प्रयासों पर भी चर्चा हुई। यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब भारत UAE से ४०% से ज्यादा कच्चा तेल और LNG आयात करता है।
प्रभाव: यह बैठक भारत की विदेश नीति के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। अगर पश्चिम एशिया में संकट बढ़ा तो तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं, जिसका सीधा असर भारत की अर्थव्यवस्था और आम आदमी की जेब पर पड़ेगा। UAE के साथ मजबूत संबंध भारत को क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने में मदद करेंगे।
इसके अलावा भारतीय डायस्पोरा की सुरक्षा, द्विपक्षीय व्यापार (वर्तमान में १०० बिलियन डॉलर से ज्यादा) और निवेश भी बढ़ेगा। यह मुलाकात भारत को ‘वोइस ऑफ ग्लोबल साउथ’ के रूप में और मजबूत करती है।
निष्कर्ष: NSA अजित डोभाल की यह यात्रा दिखाती है कि भारत सिर्फ देखने वाला नहीं बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता में सक्रिय भूमिका निभाने वाला देश है। कूटनीति के जरिए हम अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा कर रहे हैं।
सरकार को चाहिए कि UAE के साथ ऊर्जा सुरक्षा पर लंबी अवधि के समझौते करे और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों को भी बढ़ावा दे। भारत की कूटनीति को और सक्रिय रखना होगा ताकि पश्चिम एशिया का कोई भी संकट हमारी अर्थव्यवस्था और सुरक्षा को कम से कम प्रभावित करे।
स्रोत: The Hindu, Economic Times, WAM (UAE News Agency) (27 अप्रैल 2026) |
Rinews Desk | 27 अप्रैल 2026