RI News Desk | 26 मार्च 2026

ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच जारी युद्ध 26वें दिन और अधिक गंभीर हो गया है। इस संघर्ष ने अब वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा आपूर्ति और भारत की आर्थिक स्थिरता पर सीधा प्रभाव डालना शुरू कर दिया है। खासतौर पर होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बढ़ता तनाव दुनिया के लिए चिंता का बड़ा कारण बन गया है।
ईरान ने शांति प्रस्ताव ठुकराया, अपनी शर्तें रखीं
ईरान ने अमेरिका द्वारा दिए गए शांति प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया है और अपनी शर्तें सामने रखी हैं। इन शर्तों में युद्ध की क्षतिपूर्ति और होर्मुज स्ट्रेट पर पूर्ण संप्रभुता की मांग शामिल है। ईरान ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उसकी शर्तें नहीं मानी गईं तो वह इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को दुश्मन देशों के लिए बंद कर सकता है। हालांकि भारत समेत कुछ देशों को जहाजों के आवागमन की अनुमति दी गई है।
विशेषज्ञों के अनुसार, होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के कुल तेल व्यापार का लगभग 20% वहन करता है। यदि यह मार्ग बाधित होता है, तो वैश्विक स्तर पर तेल संकट और महंगाई तेजी से बढ़ सकती है।
मिसाइल और ड्रोन हमले तेज, अमेरिकी बेस प्रभावित
ईरान ने अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले जारी रखे हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, करीब 13 अमेरिकी सैन्य बेस को भारी नुकसान हुआ है और उन्हें रहने योग्य नहीं बताया गया है। इसके जवाब में अमेरिका और इजरायल ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए हैं।
इजरायल की ओर से यह दावा किया गया है कि ईरान के IRGC नेवी कमांडर को इन हमलों में मार गिराया गया है, हालांकि ईरान ने अभी तक इसकी पुष्टि नहीं की है।
अमेरिका की चेतावनी, यूरोप की चिंता
अमेरिकी प्रशासन ने ईरान को चेतावनी दी है कि वह तुरंत संघर्ष समाप्त करे, अन्यथा और बड़े हमलों का सामना करना पड़ेगा। वहीं जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मेर्ज़ ने अमेरिका से अपील की है कि युद्ध को जल्द खत्म किया जाए ताकि तेल की कीमतों को नियंत्रित रखा जा सके।
यूरोपीय देशों के लिए यह संकट विशेष रूप से गंभीर है क्योंकि उनकी ऊर्जा जरूरतें काफी हद तक आयात पर निर्भर हैं।
रूस की सक्रियता और परमाणु खतरा
ईरान के बूशहर न्यूक्लियर प्लांट के पास हमलों के बाद रूस ने अपने कर्मचारियों को वहां से हटा लिया है। इसके साथ ही रूस ने स्थिति को लेकर गंभीर चिंता जताई है।
ईरान ने बाब एल-मंदेब स्ट्रेट को भी बंद करने की धमकी दी है, जिससे रेड सी के जरिए होने वाला व्यापार प्रभावित हो सकता है। यदि दोनों समुद्री मार्ग बाधित होते हैं, तो वैश्विक सप्लाई चेन पर गंभीर असर पड़ सकता है।
भारत में तेल और गैस को लेकर अफवाहें
इस युद्ध के प्रभाव के कारण भारत के कई शहरों में पेट्रोल और डीजल को लेकर अफवाहें फैल गई हैं। इंदौर, अहमदाबाद और राजकोट जैसे शहरों में पेट्रोल पंपों पर भीड़ देखी गई। LPG की कमी को लेकर भी भ्रम की स्थिति बनी रही।
सरकार ने इन सभी अफवाहों को खारिज करते हुए कहा है कि देश में पर्याप्त तेल और गैस का भंडार मौजूद है और आपूर्ति पूरी तरह सामान्य है। कमर्शियल LPG के अतिरिक्त आवंटन का भी निर्णय लिया गया है।
सरकार की तैयारी और रणनीति
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद में इस स्थिति को चिंताजनक बताया और कहा कि सरकार लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी सुरक्षा समीक्षा बैठक की और आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए।
भारत ने होर्मुज स्ट्रेट से अपने जहाजों को सुरक्षित निकालने के लिए विशेष व्यवस्था की है, जिससे ऊर्जा आपूर्ति पर किसी भी संभावित खतरे को कम किया जा सके।
अन्य महत्वपूर्ण अपडेट
देश में अक्षरधाम में दुनिया की सबसे ऊंची “एक पैर पर खड़ी” प्रतिमा के लोकार्पण की खबर है। वहीं उत्तर प्रदेश में रामनवमी और महावीर जयंती के चलते कई सरकारी कार्यालयों के चार दिन तक बंद रहने की संभावना जताई जा रही है।
समग्र विश्लेषण: वैश्विक संकट की ओर बढ़ता युद्ध
ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच यह संघर्ष अब एक बड़े वैश्विक संकट का रूप लेता जा रहा है। यदि होर्मुज और बाब एल-मंदेब जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग प्रभावित होते हैं, तो इसका असर सीधे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।
भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती उसकी ऊर्जा आयात निर्भरता है। ऐसे में सरकार की रणनीतिक तैयारी और वैकल्पिक आपूर्ति स्रोतों की खोज बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या कूटनीतिक प्रयास इस युद्ध को रोकने में सफल हो पाते हैं या दुनिया को एक बड़े आर्थिक संकट का सामना करना पड़ेगा।
