— RI News Desk | 19 March 2026
भारत के रक्षा उत्पादन क्षेत्र में एक बड़ी प्रगति सामने आई है। HAL Tejas Mk1A Order 2026 के तहत हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के पास 34 ध्रुव हेलीकॉप्टर, 180 LCA तेजस Mk-1A लड़ाकू विमान और 156 प्रचंड अटैक हेलीकॉप्टर की आपूर्ति का बड़ा ऑर्डर मौजूद है। यह ऑर्डर भारतीय सेना और वायुसेना की क्षमता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
HAL के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक (CMD) ने समिति को बताया कि HAL Tejas Mk1A Order 2026 कार्यक्रम में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। उन्होंने कहा कि कंपनी ने अब तक पांच तेजस Mk-1A विमान पूरी तरह तैयार कर लिए हैं और ये डिलीवरी के लिए तैयार हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, तेजस Mk-1A के लिए ASRAAM और ASTRA मिसाइलों का सफल परीक्षण किया गया है। इन परीक्षणों की सफलता HAL Tejas Mk1A Order 2026 को तकनीकी रूप से मजबूत बनाती है और भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देती है।

तेजस Mk1A और प्रचंड हेलीकॉप्टर से बढ़ेगी भारत की रक्षा ताकत
भारत के रक्षा उत्पादन क्षेत्र में एक बड़ी प्रगति सामने आई है। सरकारी एयरोस्पेस कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) ने संसद की रक्षा संबंधी स्थायी समिति को जानकारी दी है कि उसके पास वर्तमान में 34 ध्रुव हेलीकॉप्टर, 180 LCA तेजस Mk-1A लड़ाकू विमान और 156 प्रचंड अटैक हेलीकॉप्टर की आपूर्ति का बड़ा ऑर्डर मौजूद है। यह ऑर्डर भारतीय सेना और वायुसेना की क्षमता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
HAL के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक (CMD) ने समिति को बताया कि तेजस Mk-1A कार्यक्रम में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। उन्होंने कहा कि कंपनी ने अब तक पांच तेजस Mk-1A विमान पूरी तरह तैयार कर लिए हैं और ये डिलीवरी के लिए तैयार हैं। इसके अलावा, रडार और डिजिटल वारफेयर यूनिट (DWU) का सफल इंटीग्रेशन भी पूरा किया जा चुका है।
रिपोर्ट के अनुसार, तेजस Mk-1A के लिए ASRAAM (Advanced Short Range Air-to-Air Missile) और ASTRA (Beyond Visual Range Missile) का सफल परीक्षण किया गया है। इन परीक्षणों की सफलता भारतीय रक्षा तकनीक की विश्वसनीयता और आत्मनिर्भरता को मजबूत करती है।
HAL ने उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए भी बड़े कदम उठाए हैं। नासिक में तेजस विमान के लिए तीसरी उत्पादन लाइन शुरू की गई है, जिससे उत्पादन क्षमता बढ़ाकर 24 विमान प्रति वर्ष करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा HTT-40 ट्रेनर विमान के लिए दूसरी उत्पादन लाइन भी स्थापित की गई है, जिससे प्रशिक्षण विमानों के निर्माण में तेजी आएगी।
कंपनी के पास वर्तमान में लगभग 2,22,182 करोड़ रुपये का विशाल ऑर्डर बुक है, जिसकी डिलीवरी 2034 तक पूरी की जानी है। इसमें तेजस Mk-1A, ध्रुव हेलीकॉप्टर, डोर्नियर (Do-228) और अन्य महत्वपूर्ण रक्षा परियोजनाएं शामिल हैं।
HAL ने यह भी बताया कि ध्रुव हेलीकॉप्टर की अब तक 72 यूनिट डिलीवर की जा चुकी हैं, जबकि प्रचंड हेलीकॉप्टर की 15 यूनिट पहले ही सेना को दी जा चुकी हैं। इसी प्रदर्शन के आधार पर अब 156 नए प्रचंड हेलीकॉप्टर का बड़ा ऑर्डर प्राप्त हुआ है।
इसके अतिरिक्त HAL को 12 Su-30MKI लड़ाकू विमानों और 240 AL31FP इंजन का भी ऑर्डर मिला है। कंपनी इन इंजनों की आपूर्ति चरणबद्ध तरीके से कर रही है, जिससे भारतीय वायुसेना की ऑपरेशनल क्षमता और मजबूत होगी।
रक्षा मंत्रालय द्वारा 2021 में HAL के साथ लगभग 48,000 करोड़ रुपये का बड़ा समझौता किया गया था, जिसके तहत 83 तेजस Mk-1A विमान खरीदे जाने थे। हालांकि इन विमानों की डिलीवरी में देरी हो रही है, जिसका मुख्य कारण GE Aerospace द्वारा इंजन आपूर्ति में देरी बताया गया है।
विश्लेषण
यह ऑर्डर भारत की रक्षा नीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव को दर्शाता है। पहले जहां भारत बड़े पैमाने पर विदेशी हथियारों पर निर्भर था, वहीं अब देश तेजी से स्वदेशी उत्पादन की ओर बढ़ रहा है। HAL का मजबूत ऑर्डर बुक यह संकेत देता है कि आने वाले वर्षों में भारत रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता की दिशा में और आगे बढ़ेगा।
तेजस Mk-1A और प्रचंड जैसे प्लेटफॉर्म न केवल तकनीकी रूप से उन्नत हैं, बल्कि ये भारत की सामरिक क्षमता को भी मजबूत करते हैं। खासकर तेजस कार्यक्रम भारत के लिए एक प्रतिष्ठित परियोजना बन चुका है, जो वैश्विक स्तर पर भी ध्यान आकर्षित कर रहा है।
हालांकि इंजन आपूर्ति में देरी जैसी चुनौतियां अभी भी मौजूद हैं, लेकिन उत्पादन क्षमता बढ़ाने और नई लाइन शुरू करने जैसे कदम इन समस्याओं को कम करने में मदद कर सकते हैं।
प्रभाव
इस बड़े ऑर्डर का सीधा प्रभाव भारतीय सशस्त्र बलों की ताकत पर पड़ेगा। वायुसेना को नए लड़ाकू विमान मिलने से उसकी युद्ध क्षमता और निगरानी क्षमता दोनों मजबूत होंगी। वहीं प्रचंड हेलीकॉप्टर सेना को पर्वतीय और सीमावर्ती क्षेत्रों में बढ़त देंगे।
आर्थिक दृष्टि से भी यह ऑर्डर महत्वपूर्ण है। इससे देश में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और रक्षा उद्योग में निवेश को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही भारत के रक्षा निर्यात को भी बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
दीर्घकालिक रूप से देखा जाए तो यह कदम भारत को वैश्विक रक्षा बाजार में एक मजबूत खिलाड़ी के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
