ईरान-इज़राइल युद्ध: तेल अवीव पर मिसाइल-ड्रोन हमले, गल्फ देशों और LNG सप्लाई पर बड़ा असर

— RI News Desk | 7 मार्च 2026

ईरान-इज़राइल युद्ध

मध्य-पूर्व में जारी युद्ध ने अब बड़ा अंतरराष्ट्रीय रूप ले लिया है। ईरान ने इज़राइल के तेल अवीव समेत कई शहरों पर कई चरणों में मिसाइल और ड्रोन हमले किए। वहीं, गल्फ देशों में अमेरिकी ठिकानों और ऊर्जा ढांचे को भी निशाना बनाया गया, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारी उथल-पुथल मच गई है।

ईरान-इज़राइल युद्ध के दौरान तेल अवीव के आसमान में मिसाइल इंटरसेप्शन
ईरान द्वारा दागी गई मिसाइलों को तेल अवीव के ऊपर इज़राइल के एयर डिफेंस सिस्टम द्वारा इंटरसेप्ट किया जाता हुआ दृश्य।

तेल अवीव पर मिसाइल और ड्रोन हमले

रिपोर्ट्स के अनुसार ईरान ने तेल अवीव और आसपास के इलाकों पर कई बैरेज में मिसाइल और ड्रोन लॉन्च किए। इनमें से कुछ मिसाइलें क्लस्टर वॉरहेड से लैस बताई जा रही हैं। इज़राइल के एयर डिफेंस सिस्टम ने अधिकांश मिसाइलों को इंटरसेप्ट कर लिया, लेकिन कुछ हमले जमीन पर गिरे।

एक घटना में कम से कम 12 लोगों के घायल होने की खबर है। इज़राइली सेना का कहना है कि जवाबी कार्रवाई में ईरान के कई लॉन्चर और सैन्य ठिकानों को नष्ट कर दिया गया है, जिसके कारण हमलों की तीव्रता धीरे-धीरे कम हो रही है।

गल्फ देशों और अमेरिकी ठिकानों पर हमले

ईरान ने इस संघर्ष को इज़राइल तक सीमित नहीं रखा। यूएई, सऊदी अरब, कतर, बहरीन, कुवैत और इराक में मौजूद अमेरिकी और सहयोगी सैन्य ठिकानों पर भी सैकड़ों ड्रोन और मिसाइल हमले किए गए।

रिपोर्ट्स के अनुसार कतर के Al Udeid Air Base, बहरीन में अमेरिकी Fifth Fleet के ठिकानों और रियाद स्थित अमेरिकी दूतावास को भी निशाना बनाया गया। अधिकांश हमलों को एयर डिफेंस सिस्टम ने रोक लिया, लेकिन कुछ जगहों पर आग और नुकसान की घटनाएं सामने आई हैं।

ऊर्जा बाजार में हड़कंप

इस युद्ध का सबसे बड़ा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ा है। कतर के Ras Laffan LNG प्लांट्स पर ड्रोन हमलों के बाद LNG उत्पादन अस्थायी रूप से रोक दिया गया है।

कतर दुनिया की लगभग 20% LNG सप्लाई देता है, इसलिए इस रुकावट से वैश्विक गैस बाजार में भारी उछाल देखने को मिला।

तेल और गैस की कीमतों में उछाल

रिपोर्ट्स के अनुसार LNG और प्राकृतिक गैस की कीमतें 45% से 66% तक बढ़ गई हैं। वहीं कच्चे तेल की कीमतों में भी 5% से 7% तक तेजी दर्ज की गई है।

Strait of Hormuz में जहाजों की आवाजाही लगभग रुकने से ऊर्जा आपूर्ति को लेकर दुनिया भर में चिंता बढ़ गई है।

विश्लेषण

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह संघर्ष और बढ़ता है तो वैश्विक ऊर्जा बाजार, व्यापार और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। मध्य-पूर्व का यह संकट अब केवल क्षेत्रीय युद्ध नहीं रह गया, बल्कि वैश्विक आर्थिक अस्थिरता का कारण बन सकता है।

विशेषज्ञों की राय

अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह संघर्ष केवल ईरान और इज़राइल तक सीमित नहीं रहेगा। यदि गल्फ क्षेत्र के अमेरिकी ठिकाने और ऊर्जा ढांचे लगातार निशाने पर आते रहे, तो यह युद्ध व्यापक क्षेत्रीय संघर्ष का रूप ले सकता है।

ऊर्जा बाजार के विश्लेषकों के अनुसार कतर के LNG उत्पादन में रुकावट और होरमुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ सकती है। इससे यूरोप और एशिया में गैस और तेल की कीमतों पर सीधा प्रभाव पड़ेगा।

RI News की विशेष संपादकीय

मध्य-पूर्व का यह युद्ध केवल सैन्य टकराव नहीं है, बल्कि वैश्विक शक्ति संतुलन और ऊर्जा राजनीति का भी संघर्ष बनता जा रहा है। इतिहास बताता है कि जब भी पश्चिम एशिया में युद्ध गहराता है, तो उसका प्रभाव पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और राजनीति पर पड़ता है।

आज का संकट भी उसी दिशा में बढ़ता दिखाई दे रहा है। ऊर्जा आपूर्ति, समुद्री व्यापार मार्ग और महाशक्तियों की रणनीतिक प्रतिस्पर्धा इस युद्ध को और जटिल बना सकती है।

ऐसे समय में अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि युद्ध को और फैलने से रोका जाए। यदि कूटनीतिक प्रयास असफल रहे तो यह संघर्ष आने वाले समय में वैश्विक आर्थिक संकट और व्यापक अस्थिरता का कारण बन सकता है।

इस संघर्ष की पूरी पृष्ठभूमि और मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव को विस्तार से समझने के लिए यह रिपोर्ट भी पढ़ें —
ईरान-अमेरिका-इज़राइल संघर्ष: मध्य-पूर्व में बढ़ता युद्ध संकट.

स्रोत: Al Jazeera, BBC, Reuters, CNBC, The New York Times, CSIS

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