RiNews Desk नई दिल्ली | 23 फरवरी 2026
भारत मंडपम, प्रगति मैदान में आयोजित इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026 के दौरान 20 फरवरी को उस समय अप्रत्याशित स्थिति पैदा हो गई, जब भारतीय युवा कांग्रेस के कुछ कार्यकर्ताओं ने सम्मेलन स्थल के भीतर प्रवेश कर विरोध प्रदर्शन किया। यह समिट अंतरराष्ट्रीय स्तर का था, जिसमें विदेशी प्रतिनिधि, तकनीकी विशेषज्ञ और वैश्विक संस्थानों से जुड़े लोग मौजूद थे।
प्रत्यक्षदर्शियों और पुलिस के अनुसार, लगभग 10–12 कार्यकर्ता सुरक्षा घेरा तोड़कर एक्ज़िबिशन हॉल में पहुंचे और वहां शर्टलेस होकर नारेबाज़ी शुरू कर दी। प्रदर्शनकारियों के हाथों में ऐसी टी-शर्ट्स थीं, जिन पर प्रधानमंत्री और भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर आपत्तिजनक नारे लिखे थे। कुछ टी-शर्ट्स पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तस्वीरें भी थीं। अचानक हुए इस घटनाक्रम से कुछ समय के लिए समिट की गतिविधियां बाधित हुईं।
घटना की सूचना मिलते ही सुरक्षा एजेंसियों ने तत्काल कार्रवाई की और सभी प्रदर्शनकारियों को बाहर निकाल दिया। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने मामले को गंभीर सुरक्षा उल्लंघन मानते हुए कार्रवाई शुरू की। पुलिस ने मौके से चार प्रमुख कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया, जिन्हें अगले दिन पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया गया। अदालत ने इन आरोपियों को पांच दिन की पुलिस रिमांड पर भेजते हुए टिप्पणी की कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर इस तरह की हरकतें देश की छवि को नुकसान पहुंचाती हैं और इसे हल्के में नहीं लिया जा सकता।
जांच आगे बढ़ने पर पुलिस ने देश के अलग-अलग हिस्सों से जुड़े कुछ और लोगों को भी हिरासत में लिया। पुलिस का कहना है कि विरोध प्रदर्शन की योजना पहले से बनाई गई थी और इसकी तैयारी में कई राज्यों के लोग शामिल थे। मामले की जांच के लिए सीसीटीवी फुटेज, फेशियल रिकग्निशन सिस्टम और एंट्री पास के डेटा का सहारा लिया जा रहा है। कुछ लोगों को पूछताछ के बाद छोड़ दिया गया है, जबकि अन्य की तलाश जारी है।
इस घटना को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी तेज़ रहीं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे राजनीति का निम्न स्तर बताया, वहीं भाजपा ने इसे देश की अंतरराष्ट्रीय छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करार दिया। दूसरी ओर कांग्रेस ने कहा कि यह लोकतांत्रिक विरोध का तरीका था और गिरफ्तारियां राजनीतिक बदले की भावना से की गई हैं। कुछ अन्य दलों ने भी विरोध के तरीके पर सवाल उठाते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर इस तरह का प्रदर्शन उचित नहीं था।
विश्लेषकों के अनुसार, यह मामला केवल कानून-व्यवस्था का नहीं बल्कि लोकतांत्रिक असहमति की मर्यादा से भी जुड़ा है। जहां एक ओर विरोध का अधिकार लोकतंत्र की बुनियाद है, वहीं दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों में सुरक्षा और देश की छवि से जुड़े सवाल भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं। इस घटना के बाद AI इम्पैक्ट समिट से जुड़ी चर्चाएं पीछे छूट गईं और राजनीतिक विवाद केंद्र में आ गया।
विश्लेषण:
भारत मंडपम में हुआ यह घटनाक्रम राजनीतिक विरोध और राष्ट्रीय प्रतिष्ठा के बीच की महीन रेखा को उजागर करता है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में असहमति और विरोध का अधिकार सभी को प्राप्त है, लेकिन उसका मंच, समय और तरीका भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है। एक अंतरराष्ट्रीय AI सम्मेलन, जहां भारत अपनी तकनीकी क्षमता और वैश्विक भागीदारी को प्रदर्शित कर रहा था, वहां इस प्रकार का शर्टलेस प्रदर्शन सुरक्षा और शिष्टाचार—दोनों के लिहाज़ से असहज स्थिति पैदा करता है। अदालत की टिप्पणी यह संकेत देती है कि राज्य व्यवस्था ऐसे मामलों को केवल राजनीतिक विरोध के रूप में नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय संदर्भ में देश की छवि से जुड़े मुद्दे के रूप में देख रही है। दूसरी ओर, कांग्रेस का यह तर्क भी सामने आता है कि सरकार की नीतियों पर सवाल उठाना लोकतंत्र का मूल तत्व है, हालांकि विरोध की शैली पर व्यापक असहमति दिखाई दी।
प्रभाव:
इस घटना का तत्काल प्रभाव यह रहा कि AI इम्पैक्ट समिट से जुड़े तकनीकी और नीति संबंधी मुद्दे चर्चा से पीछे चले गए और राजनीतिक विवाद केंद्र में आ गया। सोशल मीडिया पर वीडियो और तस्वीरों के वायरल होने से सार्वजनिक विमर्श और अधिक ध्रुवीकृत हुआ। राजनीतिक रूप से विपक्ष को जहां अपने तरीके को लेकर आलोचना झेलनी पड़ी, वहीं सरकार को भी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सुरक्षा के संतुलन पर सवालों का सामना करना पड़ा। दीर्घकालिक रूप से यह मामला भविष्य में अंतरराष्ट्रीय आयोजनों की सुरक्षा व्यवस्था और विरोध प्रदर्शनों की सीमाओं को लेकर नीतिगत सख्ती का आधार बन सकता है।
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