– एच. एन. राय (मुख्य संपादक, RiNews)
जब कोई युवा अपनी जड़ों, अपने गाँव और अपनी साझी विरासत से ऊर्जा लेकर वैश्विक मंच पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाता है, तो वह सफलता केवल व्यक्तिगत नहीं रह जाती। वह सफलता एक पूरे समाज, एक पूरी पीढ़ी और उस माटी की सामूहिक चेतना की जीत बन जाती है। आज की यह विशेष कहानी एक ऐसे ही असाधारण युवा मेधा की है, जिसने न केवल अपने परिवार और गाँव का नाम रोशन किया है, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसी अत्याधुनिक वैश्विक तकनीक के क्षेत्र में भारत का मस्तक गर्व से ऊंचा किया है।
हम बात कर रहे हैं हिमांशु राय की। गाँव-पोस्ट लउवाडिह (Lauwadih) की माटी से शुरू हुआ यह सफर आज दुनिया की सबसे बड़ी आर्थिक और तकनीकी राजधानियों में से एक, न्यूयॉर्क (अमेरिका) के केंद्र तक जा पहुंचा है। वर्तमान में वे TD बैंक (Layer Six) में Lead Scientist & Manager के रूप में एआई अनुसंधान (AI Research) की कमान संभाल रहे हैं।

चित्र: वर्तमान में अमेरिका में लीड साइंटिस्ट और मैनेजर के रूप में वैश्विक स्तर पर एआई रिसर्च का नेतृत्व करते हिमांशु राय।
पारिवारिक पृष्ठभूमि: संस्कारों और साझी विरासत की मजबूत बुनियाद
हिमांशु राय की इस अद्वितीय और गौरवमयी यात्रा की जड़ें उनके पैतृक गाँव लउवाडिह में गहरी धंसी हुई हैं। वे स्वर्गीय कमला राय जी के पौत्र (पोते) और विजय शंकर राय जी के सुपुत्र हैं। बाबा स्वर्गीय कमला राय जी की साझी विरासत, उनके जीवन मूल्यों और गाँव के प्रति साझी जिम्मेदारी के संस्कारों को हिमांशु के पिता विजय शंकर राय जी ने पूरी आत्मीयता से संजोकर रखा है। यही वजह है कि न्यूयॉर्क जैसे महानगर में बैठकर भी हिमांशु के भीतर अपनी मिट्टी की खुशबू और संस्कारों की पूंजी पूरी तरह जीवंत है।
स्कूली शिक्षा से ही गढ़ दी थी सफलता की इबारत: NTSE स्कॉलर और डीपीएस गोल्ड मेडलिस्ट
हिमांशु की इस असाधारण यात्रा की नींव बेहद अनुशासित और शैक्षणिक रूप से समृद्ध माहौल में पड़ी। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा देश के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान डीपीएस भिलाई (DPS Bhilai) से पूरी की। वे बचपन से ही विलक्षण प्रतिभा के धनी थे, जिसका प्रमाण उन्होंने स्कूली दिनों में ही दे दिया था। हिमांशु ने स्कूली शिक्षा के दौरान ही देश की सबसे प्रतिष्ठित और कठिन परीक्षाओं में से एक NTSE (National Talent Search Examination) को सफलतापूर्वक क्लियर किया।
इतना ही नहीं, वे डीपीएस भिलाई में अपने उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए गोल्ड मेडलिस्ट (Gold Medalist) भी रहे। उन्हें विद्यालय के एक भव्य कार्यक्रम के दौरान सम्मानित किया गया था, जिसने उनके जीवन में उत्कृष्टता के इस सफर की शुरुआत की थी।

चित्र: डीपीएस भिलाई में पढ़ाई के दौरान उत्कृष्ट अकादमिक प्रदर्शन के लिए गोल्ड मेडल से सम्मानित होते बाल्यकाल के हिमांशु राय।
आईआईटी पटना से कनाडा (Saskatchewan) और टोरंटो की ‘वॉल ऑफ एक्सीलेंस’ तक
स्कूली शिक्षा के बाद, उन्होंने देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक, आईआईटी-जेईई (IIT-JEE) को पास किया और आईआईटी पटना (IIT Patna) में दाखिला लिया। आईआईटी पटना से बी.टेक (B.Tech) की पढ़ाई के दौरान ही उनकी रिसर्च प्रतिभा को बड़ी पहचान मिली। यही वजह थी कि आईआईटी पटना ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रिसर्च और इंटर्नशिप के लिए प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी ऑफ सास्काचेवान (University of Saskatchewan), कनाडा भेजा था, जिसने उनके विदेशी अनुसंधान के रास्ते खोल दिए।

चित्र: आईआईटी पटना में पढ़ाई के दौरान इंटर्नशिप के लिए कनाडा की ‘यूनिवर्सिटी ऑफ सास्काचेवान’ पहुंचे हिमांशु राय।
आईआईटी से स्नातक होने के बाद, उन्होंने तकनीक के अगले बड़े भविष्य यानी एआई को चुना और कनाडा के शीर्ष संस्थान, यूनिवर्सिटी ऑफ टोरंटो (University of Toronto) में मास्टर ऑफ साइंस (Machine Learning and Artificial Intelligence) में प्रवेश लिया। यहाँ उनके शोध और शैक्षणिक उत्कृष्टता का स्तर इतना ऊंचा था कि यूनिवर्सिटी ऑफ टोरंटो ने उनके सम्मान में उनकी तस्वीर को यूनिवर्सिटी की ‘वॉल ऑफ एक्सीलेंस’ (Wall of Excellence) पर प्रदर्शित किया।

चित्र: यूनिवर्सिटी ऑफ टोरंटो के ‘बाहेन सेंटर’ के वॉल ऑफ एक्सीलेंस बैनर पर प्रदर्शित हिमांशु राय का चित्र।
Kaggle में टॉप 100 रैंक और MIT व Columbia जैसी यूनिवर्सिटीज में रिसर्च टॉक्स
हिमांशु राय सिर्फ एक कॉर्पोरेट साइंटिस्ट नहीं हैं, बल्कि वैश्विक एआई समुदाय में उनका नाम बेहद सम्मान के साथ लिया जाता है। दुनिया भर के टॉप एआई वैज्ञानिकों और डेटा साइंटिस्ट्स के सबसे बड़े वैश्विक मंच Kaggle पर हिमांशु ने टॉप 100 (Top 100 Rank) में अपनी जगह बनाई है, जो अपने आप में एक अभूतपूर्व उपलब्धि है।
इसके अलावा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग के क्षेत्र में उनके गहन शोध के कारण उन्हें दुनिया भर से आमंत्रित किया जाता है। वे दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटीज जैसे एमआईटी (MIT – Massachusetts Institute of Technology) और कोलंबिया यूनिवर्सिटी (Columbia University) में रिसर्च कोलाबोरेशन, तकनीकी चर्चा और विशेष व्याख्यान (Research and Industry Talks) के लिए आमंत्रित किए जाते रहे हैं।

चित्र: टीडी बैंक के अंतरराष्ट्रीय अधिकारियों और वैज्ञानिकों के साथ हाई-लेवल बोर्डरूम मीटिंग में एआई रणनीति तय करते हिमांशु (नीली शर्ट में)।
न्यूयॉर्क में ‘Lead Scientist & Manager’ के रूप में वैश्विक कमान
कनाडा की प्रतिष्ठित एआई कंपनी ‘लेयर सिक्स’ (Layer Six, Toronto) में सीनियर साइंटिस्ट के रूप में अपनी सेवाएं देने के बाद, जब उत्तरी अमेरिका के प्रमुख टीडी बैंक (TD Bank) ने लेयर सिक्स का टेकओवर किया, तो हिमांशु के कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी आ गई। बैंक ने अमेरिका के वित्तीय और तकनीकी केंद्र, न्यूयॉर्क (New York) में अपनी नई अत्याधुनिक एआई रिसर्च विंग स्थापित की।
हिमांशु को उनके असाधारण ट्रैक रिकॉर्ड के कारण प्रोन्नत (Promote) कर न्यूयॉर्क में Lead Scientist & Science Manager की कमान सौंपी गई। आज वे न्यूयॉर्क में बैठकर एआई के भविष्य को आकार देने वाली अंतरराष्ट्रीय टीम का नेतृत्व कर रहे हैं और विभिन्न वैश्विक मंचों पर बैंक का प्रतिनिधित्व करते हैं।
✉️ देश और गाँव के युवाओं के लिए हिमांशु राय का विशेष संदेश (Message to Youth):
“Your dreams are valid, no matter where you come from. With dedication, discipline and unwavering perseverance you can achieve anything. Don’t be afraid of failure. Every setback is an opportunity to learn and grow stronger. Stay focused on your goals, make good use of your time and keep improving every day. Success rarely comes overnight, but every sincere effort brings you one step closer.”
— Himanshu Rai
Lead Scientist & Science Manager, New York (USA)

चित्र: तकनीक और अनुसंधान की दुनिया में भारत और गाजीपुर का नाम ऊंचा करने वाले युवा वैज्ञानिक हिमांशु राय का एक और प्रभावशाली रूप।
Ri विश्लेषण (RI Analysis):
मुख्य संपादक के रूप में, जब हम हिमांशु राय की इस पूरी यात्रा का विश्लेषण करते हैं, तो हमारे सामने तीन बेहद महत्वपूर्ण बिंदु उभर कर आते हैं:
- हिमांशु की यह सफलता किसी संयोग का परिणाम नहीं है। उनके पिता, विजय शंकर राय जी द्वारा साझा किए गए प्रामाणिक विवरण और वास्तविक लाइव तस्वीरें यह बताती हैं कि इस सफलता के पीछे वर्षों की कड़ी मेहनत, सही दिशा और माता-पिता के अनवरत संस्कार की बड़ी भूमिका रही है।
- गहन विश्लेषण (Analysis): आज जब पूरी दुनिया एआई (AI) के प्रभाव को लेकर चर्चा कर रही है, तब गाजीपुर के एक छोटे से गाँव लउवाडिह की मिट्टी से निकला एक युवा न्यूयॉर्क में बैठकर इस तकनीक के भविष्य को आकार दे रहा है। स्कूली दिनों में NTSE और गोल्ड मेडल से लेकर एमआईटी और कोलंबिया जैसी जगहों पर व्याख्यान देना यह साबित करता है कि निरंतर सुधार (Continuous Improvement) ही वैश्विक नेतृत्व की कुंजी है।
- प्रभाव और प्रेरणा (Impact): इस स्टोरी का सबसे बड़ा प्रभाव हमारी आने वाली पीढ़ी पर पड़ेगा। जब हमारे ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चे हिमांशु का यह संदेश पढ़ेंगे कि “आपके सपने सच होते हैं, चाहे आप कहीं से भी आते हों”, तो उनके भीतर का आत्मविश्वास जागेगा। यह कहानी युवाओं को कोडिंग, डेटा साइंस और इंटरनेशनल रिसर्च जैसे आधुनिक क्षेत्रों में जाने के लिए प्रेरित करेगी।
निष्कर्ष: साझी विरासत के प्रति साझा सम्मान
हिमांशु राय की कहानी सिर्फ एक सफल करियर की कहानी नहीं है, बल्कि यह इस बात की मिसाल है कि हम अपनी जड़ों से कितनी भी दूर चले जाएं, हमारी माटी की महक हमारे साथ रहती है। स्वर्गीय कमला राय जी की विरासत और विजय शंकर राय जी का अपनी जड़ों के प्रति सम्मान यह दिखाता है कि संस्कारों की पूंजी ही बच्चों को इतनी ऊंची उड़ान देने में सक्षम बनाती है।
RiNews प्रिय बाबू हिमांशु राय की इस अद्भुत वैश्विक यात्रा को सलाम करता है। हमें गर्व है कि हमारी माटी का लाल आज वैश्विक तकनीक का नेतृत्व कर रहा है।
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अभी शॉप करेंस्रोतः आरआई न्यूज फीड नेटवर्क (एकीकृत) | संपादक मंडल: आरआई न्यूज डेस्क (RI News Desk)
📅 प्रकाशित तिथि: 30 Jun 2026 को 12:46 PM बजे | गाजीपुर, उत्तर प्रदेश


