वॉशिंगटन/ओटावा: क्या पृथ्वी एक बार फिर पूरी तरह बर्फ की चादर में लिपटने वाली है? वैज्ञानिकों के एक नए भू-वैज्ञानिक अध्ययन (Geological Study) ने इस बहस को दोबारा गर्म कर दिया है। कनाडा के प्राचीन ज्वालामुखीय क्षेत्रों में हुए शोध के आधार पर शोधकर्ताओं ने दावा किया है कि लाखों साल पहले हुए भीषण ज्वालामुखीय विस्फोटों ने पृथ्वी के वायुमंडल में बड़े पैमाने पर कार्बन डाइऑक्साइड और सल्फर गैसेस को ब्लॉक कर दिया था, जिससे वैश्विक तापमान में भारी गिरावट आई और धरती ‘स्टर्टियन ग्लेशिएशन’ (Sturtian Glaciation) यानी सबसे लंबे हिम युग के दौर में चली गई थी, जिसे ‘स्नोबॉल अर्थ’ भी कहा जाता है।
वैज्ञानिकों का कहना है कि वर्तमान में बदल रहे वैश्विक क्लाइमेट पैटर्न और टेक्टोनिक प्लेटों की हलचल के कारण यह आशंका पूरी तरह खारिज नहीं की जा सकती कि भविष्य में ऐसे ज्वालामुखी विस्फोट पृथ्वी को दोबारा किसी मिनी या पूर्ण हिम युग की तरफ धकेल दें।
Ri विश्लेषण (RI Analysis)
इस वैज्ञानिक शोध और इसके दावों के तीन मुख्य आयाम हैं जिन्हें समझना जरूरी है:
- स्रोतों की सक्रियता (Active Source): यह खबर अंतरराष्ट्रीय भू-वैज्ञानिक शोध पत्रिकाओं (Geological Journals) और वैज्ञानिकों के हालिया अध्ययनों के आधार पर संकलित की गई है, जो पृथ्वी के इतिहास में आए सबसे लंबे क्रायोजेनियन काल (Cryogenian Period) के हिम युग के कारणों की व्याख्या करती है।
- गहन विश्लेषण (Analysis): आमतौर पर यह माना जाता है कि ज्वालामुखी विस्फोट से गर्मी और ग्लोबल वार्मिंग बढ़ती है, लेकिन विज्ञान का यह पहलू इसके ठीक विपरीत है। जब एक निश्चित बेल्ट (जैसे कनाडा का प्राचीन क्षेत्र) में लगातार हजारों वर्षों तक विशाल विस्फोट होते हैं, तो उनसे निकलने वाला एरोसोल और सल्फर सूरज की रोशनी को पूरी तरह ब्लॉक कर देता है। इससे एक ‘अल्ट्रा-कूलिंग इफेक्ट’ पैदा होता है। वैज्ञानिकों का यह दावा आज के संदर्भ में इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दिखाता है कि पृथ्वी का क्लाइमेट सिस्टम कितना संवेदनशील और अप्रत्याशित है।
- प्रभाव (Impact): हालांकि यह प्रक्रिया रातोंरात नहीं होती और इसमें लाखों साल लगते हैं, लेकिन इस तरह के शोध मानव जाति को यह समझने में मदद करते हैं कि पृथ्वी के प्राकृतिक वेंटिलेशन और कार्बन चक्र (Carbon Cycle) में जरा सा भी बड़ा व्यवधान पूरी मानवता के अस्तित्व को संकट में डाल सकता है।
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🔬 इस भू-वैज्ञानिक खोज और वैज्ञानिकों के दावों की पूरी विस्तृत रिपोर्ट पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर जाएं:
स्रोत आभार (Source Credit): अमर उजाला नेटवर्क (अंतरराष्ट्रीय भू-वैज्ञानिक अध्ययन इनपुट)
मूल प्रकाशन तिथि: 29 जून 2026
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अभी शॉप करेंस्रोतः आरआई न्यूज फीड नेटवर्क (एकीकृत) | संपादक मंडल: आरआई न्यूज डेस्क (RI News Desk)
📅 प्रकाशित तिथि: 29 Jun 2026 को 10:43 AM बजे | गाजीपुर, उत्तर प्रदेश
