RiNews (रक्षा डेस्क): वैश्विक स्तर पर बदलते सैन्य समीकरणों के बीच भारत अपनी रणनीतिक मारक क्षमता को एक नए युग में ले जाने के लिए तैयार है। रक्षा उद्योग के आधिकारिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, भारत और रूस अब संयुक्त रूप से अपनी सबसे सफल और घातक मिसाइल ‘ब्रह्मोस’ (BrahMos) के नए, छोटे और हाइपरसोनिक (Hypersonic) वेरिएंट्स को विकसित करने पर तेजी से काम कर रहे हैं। यह कदम भारतीय सशस्त्र बलों को दुनिया की सबसे आधुनिक सेनाओं के समकक्ष खड़ा कर देगा।
ब्रह्मोस के छोटे और हाइपरसोनिक वेरिएंट का तकनीकी विश्लेषण
वर्तमान में ब्रह्मोस को दुनिया की सबसे तेज और अचूक सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों में गिना जाता है, जो मैक 2.8 की रफ्तार से प्रहार करने में सक्षम है। टाइम्स ऑफ इंडिया द्वारा ट्रैक की गई रक्षा रिपोर्टों के अनुसार, इसके आगामी ‘हाइपरसोनिक’ वेरिएंट की गति मैक 5 (ध्वनि की गति से पांच गुना तेज) या उससे अधिक होने का अनुमान है। इतनी उच्च गति और आक्रामक प्रक्षेपवक्र (trajectory) के कारण, इस मिसाइल को ट्रैक करना और पैट्रियट जैसे आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम के लिए समय रहते इंटरसेप्ट करना बेहद चुनौतीपूर्ण और जटिल हो जाता है।

भारत-रूस संयुक्त उपक्रम के तहत ब्रह्मोस का नया वेरिएंट तैयार किया जा रहा है।
दूरगामी प्रभाव (Impact Analysis): हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की धमक
इस परियोजना का दूरगामी प्रभाव भारत की भू-राजनीतिक (Geopolitical) स्थिति को बेहद मजबूत करेगा। चीन और पाकिस्तान की सीमाओं पर बढ़ते तनाव को देखते हुए, सुखोई और तेजस विमानों में हाइपरसोनिक मिसाइलों की तैनाती एक मजबूत निवारक (Deterrent) का काम करेगी। इसके अतिरिक्त, इस छोटे वेरिएंट के सफल परीक्षण के बाद वैश्विक बाजार में, विशेषकर दक्षिण-पूर्व एशिया और मध्य पूर्व के देशों में, भारत के रक्षा निर्यात (Defense Export) की संभावनाएं कई गुना बढ़ जाएंगी। फिलीपींस को ब्रह्मोस बेचने के बाद भारत अब एक बड़े वैश्विक डिफेंस हब के रूप में उभर रहा है।
स्रोतः आरआई न्यूज फीड नेटवर्क (एकीकृत) | संपादक मंडल: आरआई न्यूज डेस्क (RI News Desk)
📅 प्रकाशित तिथि: 19 Jun 2026 को 06:10 PM बजे | गाजीपुर, उत्तर प्रदेश



