
सार: पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) में राजनीतिक संकट गहराता नजर आ रहा है। पार्टी के 20 बागी लोकसभा सांसद सोमवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर स्वयं को “असली TMC” के रूप में मान्यता देने की मांग कर सकते हैं।
पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बड़े घटनाक्रम के तहत तृणमूल कांग्रेस के 20 बागी सांसदों ने पार्टी नेतृत्व के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। जानकारी के अनुसार, यह गुट सोमवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात करेगा और संसद में अलग पहचान की मांग रखेगा। इस बीच बागी गुट में शामिल सांसद सायोनी घोष और माला रॉय रविवार को कोलकाता से दिल्ली के लिए रवाना हो गईं। दोनों नेताओं की यह यात्रा आगामी राजनीतिक रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
उधर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने संगठनात्मक स्तर पर बड़ा कदम उठाते हुए सायोनी घोष को पार्टी की युवा इकाई के अध्यक्ष पद से हटा दिया है। उनकी जगह अण्रब बनर्जी को नई जिम्मेदारी सौंपी गई है। वहीं माला रॉय को भी महिला मोर्चा अध्यक्ष पद से मुक्त कर दिया गया है। बताया जा रहा है कि यह निर्णय 12 जून को लिया गया था, जिसकी जानकारी अब सार्वजनिक हुई है।
लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस के कुल 28 सांसद हैं। यदि 20 सांसदों का यह गुट अलग पहचान प्राप्त करने में सफल होता है तो ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले मूल गुट के पास केवल 8 सांसद शेष रह जाएंगे। इससे संसद में पार्टी की राजनीतिक स्थिति और प्रभाव पर महत्वपूर्ण असर पड़ सकता है।
विश्लेषण
तृणमूल कांग्रेस के भीतर उभरा यह संकट केवल संगठनात्मक असंतोष नहीं बल्कि नेतृत्व और राजनीतिक नियंत्रण की लड़ाई के रूप में देखा जा रहा है। यदि बागी सांसद संसदीय स्तर पर अलग पहचान प्राप्त कर लेते हैं तो यह पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बड़े पुनर्गठन की शुरुआत साबित हो सकता है। लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष रखी जाने वाली दलीलें इस पूरे विवाद की दिशा तय करेंगी।
प्रभाव
इस घटनाक्रम का प्रभाव पश्चिम बंगाल की राजनीति के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी राजनीति पर भी पड़ सकता है। संसद में शक्ति संतुलन, विपक्षी गठबंधनों की रणनीति और आगामी चुनावी समीकरणों पर इसके दूरगामी परिणाम देखने को मिल सकते हैं।
निष्कर्ष
20 सांसदों के बागी गुट के रूप में सामने आने से तृणमूल कांग्रेस अपने सबसे बड़े आंतरिक संकटों में से एक का सामना कर रही है। सोमवार को लोकसभा अध्यक्ष से होने वाली मुलाकात इस राजनीतिक संघर्ष का अगला महत्वपूर्ण अध्याय साबित हो सकती है और इसके परिणाम पर पूरे राजनीतिक घटनाक्रम की दिशा निर्भर करेगी।
— RI News Desk



