आज की राष्ट्रीय खबरें: 9 जनवरी 2026 | आतंकवाद, कानून-व्यवस्था और सुरक्षा पर बड़ा अपडेट

 आतंकवाद के खिलाफ मिशन मोड में जारी रहेंगी कार्रवाई: अमित शाह

आतंकवाद के खिलाफ रणनीति पर समीक्षा बैठक करते गृह मंत्री अमित शाह
गृह मंत्री अमित शाह ने आतंकवाद, फंडिंग नेटवर्क और सीमा पार घुसपैठ के खिलाफ मिशन मोड में कार्रवाई जारी रखने के निर्देश दिए।

 RI News Desk
Date: Fri, Jan 09, 2026

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि देश में आतंकवाद के खिलाफ चल रही कार्रवाई किसी अस्थायी अभियान का हिस्सा नहीं है, बल्कि यह मिशन मोड में लगातार जारी रहने वाली रणनीति है। उन्होंने कहा कि आतंकवादी ढांचे, उनके वित्तीय नेटवर्क और सीमा पार से संचालित साजिशों को जड़ से खत्म करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

गृह मंत्रालय की एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में शाह ने सुरक्षा एजेंसियों को निर्देश दिए कि इंटेलिजेंस आधारित अभियानों को और सशक्त किया जाए। उन्होंने ड्रोन के जरिए हथियारों की तस्करी, हवाला चैनलों और ऑनलाइन फंडिंग पर कड़ी निगरानी रखने की जरूरत बताई। शाह के अनुसार, आतंकवाद अब केवल बंदूक और विस्फोट तक सीमित नहीं है, बल्कि यह डिजिटल और आर्थिक नेटवर्क के जरिए भी फैल रहा है।

उन्होंने यह भी कहा कि NIA, ED, IB और राज्य पुलिस बलों के बीच बेहतर तालमेल से हाल के महीनों में कई स्लीपर सेल और लॉजिस्टिक नेटवर्क का भंडाफोड़ किया गया है। सरकार की नीति अब केवल घटना के बाद प्रतिक्रिया देने की नहीं, बल्कि पूर्व-निरोधक (Preventive) कार्रवाई की है।

विशेषज्ञ मानते हैं कि गृह मंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है जब जम्मू-कश्मीर और कुछ अन्य संवेदनशील इलाकों में आतंकी गतिविधियों को लेकर सतर्कता बढ़ाई गई है। यह संदेश सुरक्षा बलों के मनोबल को भी मजबूत करता है।

प्रभाव:
इस सख्त रुख से आतंकवादी संगठनों की संचालन क्षमता कमजोर होगी और आंतरिक सुरक्षा ढांचा और मजबूत होगा।

Source: ANI / PTI


 अंकिता भंडारी हत्याकांड में CBI जांच की मांग तेज, सरकार पर दबाव बढ़ा https://cdn.siasat.com/wp-content/uploads/2023/01/AAP-Anjali.jpg

 RI News Desk
Date: Fri, Jan 09, 2026

अंकिता भंडारी हत्याकांड एक बार फिर राष्ट्रीय बहस के केंद्र में आ गया है। पीड़िता के माता-पिता ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात कर मामले की CBI जांच की मांग दोहराई है। परिजनों का कहना है कि उन्हें अब तक की जांच प्रक्रिया पर भरोसा नहीं है और पूरे मामले में प्रभावशाली लोगों की भूमिका की निष्पक्ष जांच जरूरी है।

इस मांग के बाद विपक्षी दलों ने भी राज्य सरकार पर दबाव बढ़ा दिया है। कांग्रेस सहित कई दलों ने कहा है कि यदि सरकार को अपनी जांच पर भरोसा है, तो CBI जांच से पीछे हटने का कोई कारण नहीं होना चाहिए। उत्तराखंड में इस मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन भी तेज हो गए हैं।

सरकार की ओर से कहा गया है कि जांच निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से चल रही है, लेकिन CBI जांच को लेकर अभी कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, कानूनी और प्रक्रियात्मक पहलुओं पर विचार किया जा रहा है।

विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला केवल एक आपराधिक घटना नहीं रह गया है, बल्कि न्याय, जवाबदेही और राजनीतिक विश्वसनीयता से जुड़ा प्रश्न बन चुका है। सोशल मीडिया और सिविल सोसाइटी की सक्रियता ने भी सरकार पर दबाव बढ़ाया है।

प्रभाव:
CBI जांच की मांग से राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर राष्ट्रीय स्तर पर निगरानी बढ़ेगी।

Source: PTI


 पश्चिम बंगाल के राज्यपाल को मिली जान से मारने की धमकी, सुरक्षा व्यवस्था कड़ी https://rajbhavankolkata.gov.in/images/Raj%20Bhavan%20Pic-1%20-%20Copy%20%282%29.jpg

 RI News Desk
Date: Fri, Jan 09, 2026

पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सी वी आनंद बोस को ईमेल के जरिए जान से मारने की धमकी मिलने के बाद राज्य में सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं। धमकी में राज्यपाल को “ब्लास्ट” करने की बात कही गई, जिसके बाद राजभवन और उसके आसपास सुरक्षा बढ़ा दी गई है।

राज्य पुलिस ने इस मामले में प्राथमिकी दर्ज कर साइबर सेल की मदद से ईमेल की तकनीकी जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि धमकी कहां से भेजी गई और इसके पीछे किसका हाथ हो सकता है।

यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब पश्चिम बंगाल में राजनीतिक माहौल पहले से ही तनावपूर्ण है। राज्यपाल और राज्य सरकार के बीच कई मुद्दों पर टकराव की स्थिति बनी हुई है, जिससे इस धमकी को और गंभीरता से लिया जा रहा है।

संवैधानिक विशेषज्ञों का कहना है कि राज्यपाल जैसे पद पर आसीन व्यक्ति को धमकी मिलना केवल कानून-व्यवस्था का मामला नहीं, बल्कि संवैधानिक गरिमा और संघीय ढांचे से जुड़ा विषय है। केंद्र और राज्य, दोनों स्तरों पर सुरक्षा एजेंसियों की जिम्मेदारी बढ़ जाती है।

प्रभाव:
संवैधानिक पदों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल और सुरक्षा प्रोटोकॉल की समीक्षा।

Source: ANI

Source:
PTI |
ANI

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