
कोलकाता/नई दिल्ली, 8 जून 2026 | RI News
पश्चिम बंगाल की राजनीति में उथल-पुथल के बीच तृणमूल कांग्रेस (TMC) को एक और बड़ा झटका लगा है। पार्टी की वरिष्ठ सांसद काकोली घोष दस्तीदार के अनुसार, लोकसभा में TMC के लगभग 20 सांसदों ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को समर्थन देने का निर्णय लिया है और इस संबंध में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र भेजा गया है।
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब हाल ही में पश्चिम बंगाल विधानसभा में भी TMC के कई विधायकों ने अलग गुट बनाकर पार्टी नेतृत्व के खिलाफ खुला मोर्चा खोल दिया था। अब संसद में भी पार्टी के भीतर असंतोष खुलकर सामने आने लगा है।
क्या है पूरा मामला?
समाचार एजेंसी PTI के हवाले से सामने आई जानकारी के अनुसार, काकोली घोष दस्तीदार ने दावा किया कि लगभग 20 सांसद NDA के साथ जाने के पक्ष में हैं। सांसदों द्वारा लोकसभा अध्यक्ष को पत्र भेजकर अपनी स्थिति स्पष्ट की गई है।
बताया जा रहा है कि सांसदों के एक समूह ने केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के आवास पर बैठक भी की, जिसमें कई प्रमुख सांसद शामिल हुए। इस बैठक को TMC के भीतर बढ़ते असंतोष का संकेत माना जा रहा है।
राज्यसभा में भी झटका
TMC के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर राय ने सोमवार को राज्यसभा सदस्यता और पार्टी दोनों से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने अपने त्यागपत्र में पार्टी नेतृत्व की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए पश्चिम बंगाल में पार्टी की चुनावी हार के लिए संगठनात्मक कमजोरियों को जिम्मेदार ठहराया।
राज्यसभा सभापति द्वारा उनका इस्तीफा स्वीकार किए जाने के बाद अब यह सीट रिक्त हो गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम TMC के भीतर गहरे असंतोष का संकेत है।
ममता के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह संकट?
लोकसभा में TMC के 28 सांसद हैं। यदि 20 सांसद वास्तव में अलग होकर NDA का समर्थन करते हैं, तो यह पार्टी की संसदीय ताकत को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है। इसके अलावा INDIA गठबंधन में TMC की भूमिका और प्रभाव पर भी इसका असर पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद पार्टी संगठन के भीतर नेतृत्व और रणनीति को लेकर असहमति लगातार बढ़ रही है। अब यह असंतोष संसद तक पहुंच चुका है।
राजनीतिक असर
यदि सांसदों का यह समूह औपचारिक रूप से अलग गुट बनाता है और संसदीय नियमों के तहत आवश्यक संख्या जुटा लेता है, तो TMC की राष्ट्रीय राजनीति में स्थिति कमजोर हो सकती है। दूसरी ओर NDA को संसद में अतिरिक्त समर्थन मिलने की संभावना बनेगी।
हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम पर अभी पार्टी नेतृत्व की ओर से विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है और संसदीय प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही अंतिम स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
RI News विश्लेषण
पश्चिम बंगाल की राजनीति में पिछले कुछ दिनों से जारी घटनाक्रम केवल एक दल के भीतर का संकट नहीं बल्कि राष्ट्रीय विपक्ष की राजनीति के लिए भी महत्वपूर्ण है। विधानसभा में विधायकों की बगावत और अब सांसदों की नाराजगी यह संकेत देती है कि राज्य की राजनीति एक बड़े पुनर्संयोजन के दौर से गुजर रही है। आने वाले दिनों में यह घटनाक्रम NDA और INDIA गठबंधन दोनों की रणनीतियों को प्रभावित कर सकता है।
स्रोत: PTI, Times of India, The Economic Times
वेब संदर्भ:
Times of India (8 जून 2026)
The Economic Times (8 जून 2026)
PTI रिपोर्ट



