
अनुच्छेद 370 हटाना भारत की सबसे बड़ी नीतिगत भूलों में से एक: उमर अब्दुल्ला
— RI News Desk | 5 जून 2026
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने शुक्रवार को बेंगलुरु में आयोजित The Hindu Huddle 2026 कार्यक्रम में अनुच्छेद 370 को लेकर बड़ा राजनीतिक बयान दिया। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 को हटाना भारत की सबसे बड़ी नीतिगत गलतियों में से एक था। उनके इस बयान ने एक बार फिर देश में इस संवेदनशील मुद्दे पर बहस को तेज कर दिया है।
क्या कहा उमर अब्दुल्ला ने?
कार्यक्रम के दौरान उमर अब्दुल्ला ने कहा कि अनुच्छेद 370 हटाने का निर्णय जम्मू-कश्मीर के लोगों की भावनाओं और लोकतांत्रिक प्रक्रिया की अनदेखी करके लिया गया था। उन्होंने दावा किया कि इस फैसले से राज्य और केंद्र के बीच विश्वास का संकट पैदा हुआ, जिसका असर आज भी महसूस किया जा सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि जम्मू-कश्मीर में लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने और लोगों का विश्वास जीतने के लिए संवाद और राजनीतिक सहभागिता आवश्यक है।
क्या है अनुच्छेद 370?
अनुच्छेद 370 भारतीय संविधान का एक विशेष प्रावधान था, जो जम्मू-कश्मीर को अलग संवैधानिक दर्जा प्रदान करता था। अगस्त 2019 में केंद्र सरकार ने इस प्रावधान को समाप्त कर राज्य का पुनर्गठन करते हुए जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित कर दिया था।
तब से यह मुद्दा भारतीय राजनीति के सबसे चर्चित और विवादित विषयों में शामिल रहा है।
राजनीतिक महत्व
उमर अब्दुल्ला का यह बयान ऐसे समय आया है जब जम्मू-कश्मीर में राजनीतिक गतिविधियां फिर से तेज हो रही हैं। विधानसभा चुनावों और क्षेत्रीय राजनीतिक समीकरणों के बीच अनुच्छेद 370 का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक विमर्श के केंद्र में आ सकता है।
विश्लेषण
अनुच्छेद 370 पर देश में दो प्रमुख दृष्टिकोण मौजूद हैं। एक पक्ष इसे राष्ट्रीय एकीकरण और समान संवैधानिक व्यवस्था की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानता है, जबकि दूसरा पक्ष इसे जम्मू-कश्मीर की विशेष पहचान और संघीय ढांचे से जुड़े अधिकारों के हनन के रूप में देखता है।
उमर अब्दुल्ला का बयान इस बहस को पुनर्जीवित करता है और यह संकेत देता है कि क्षेत्रीय दल आने वाले समय में इस मुद्दे को राजनीतिक एजेंडे में प्रमुखता से उठाते रहेंगे।
संभावित प्रभाव
- जम्मू-कश्मीर की राजनीति में अनुच्छेद 370 का मुद्दा फिर प्रमुख बन सकता है।
- क्षेत्रीय दल और राष्ट्रीय दल इस विषय पर अपनी-अपनी रणनीतियां तेज कर सकते हैं।
- केंद्र और राज्य के संबंधों पर नई राजनीतिक बहस शुरू हो सकती है।
- आगामी चुनावों में यह एक महत्वपूर्ण चुनावी मुद्दा बन सकता है।
विपक्ष और सरकार का दृष्टिकोण
जहां नेशनल कॉन्फ्रेंस और कई विपक्षी दल अनुच्छेद 370 की बहाली की मांग या उसके महत्व पर जोर देते रहे हैं, वहीं केंद्र सरकार और उसके समर्थक दल इसे राष्ट्रीय एकता, विकास और सुरक्षा के लिए ऐतिहासिक निर्णय बताते हैं।
निष्कर्ष
उमर अब्दुल्ला के ताजा बयान ने अनुच्छेद 370 पर चल रही बहस को एक बार फिर राष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में ला दिया है। आने वाले समय में जम्मू-कश्मीर की राजनीति और केंद्र-राज्य संबंधों पर इस मुद्दे का प्रभाव देखने को मिल सकता है।
स्रोत: The Hindu Huddle 2026, The Hindu
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