
नोएडा, उत्तर प्रदेश: नोएडा प्राधिकरण कार्यालय के बाहर किसानों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर प्रदर्शन तेज कर दिया है। किसानों का आरोप है कि भूमि अधिग्रहण के बदले मिलने वाले 5% विकसित भूखंड के आवंटन में अनियमितताएं हुई हैं और पात्र किसानों को अब तक उनका अधिकार नहीं मिल सका है।
प्रदर्शनकारी किसानों ने प्राधिकरण पर भ्रष्टाचार और भेदभावपूर्ण रवैया अपनाने का आरोप लगाया। किसानों का कहना है कि वर्षों पहले अधिग्रहित की गई भूमि के बदले मिलने वाले लाभों को लेकर लगातार आश्वासन दिए गए, लेकिन अधिकांश मामलों में समस्याओं का समाधान नहीं हो पाया है।
आंदोलन के दौरान बड़ी संख्या में किसान प्राधिकरण कार्यालय के बाहर एकत्र हुए और अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी की। स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी और मौके पर पुलिस बल तैनात किया गया।
किसान नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। दूसरी ओर, प्राधिकरण अधिकारियों का कहना है कि किसानों के प्रतिनिधियों के साथ वार्ता जारी है और नियमों के अनुरूप समाधान निकालने का प्रयास किया जा रहा है।
नोएडा और ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में विकसित भूखंड, अतिरिक्त मुआवजा और प्रभावित परिवारों के पुनर्वास से जुड़े मुद्दे लंबे समय से चर्चा का विषय रहे हैं। समय-समय पर किसान संगठन इन मांगों को लेकर आंदोलन करते रहे हैं।
विश्लेषण
भूमि अधिग्रहण और पुनर्वास का मुद्दा पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सबसे संवेदनशील विषयों में से एक है। किसानों का मानना है कि शहरी विकास परियोजनाओं के लिए उनकी भूमि ली गई, लेकिन बदले में मिलने वाले लाभ समय पर नहीं दिए गए। यदि संवाद और समाधान की प्रक्रिया तेज नहीं हुई तो यह आंदोलन अन्य क्षेत्रों तक भी फैल सकता है।
प्रभाव
इस आंदोलन से नोएडा प्राधिकरण पर किसानों की मांगों के समाधान का दबाव बढ़ गया है। यदि विवाद लंबा खिंचता है तो विकास परियोजनाओं की गति प्रभावित हो सकती है। साथ ही भूमि अधिग्रहण और पुनर्वास नीतियों पर राज्य स्तर पर नई बहस भी शुरू हो सकती है।
स्रोत: किसान संगठनों के बयान, नोएडा प्राधिकरण, स्थानीय प्रशासन एवं मीडिया रिपोर्ट्स
— Awanish Kumar Rai | Bureau Chief.



