
CBSE OSM विवाद 2026: दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचा मामला, लाखों छात्रों के भविष्य पर उठे सवाल
नई दिल्ली | 2 जून 2026 | RI News Desk
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की नई On-Screen Marking (OSM) प्रणाली को लेकर देशभर में शुरू हुआ विवाद अब दिल्ली हाईकोर्ट तक पहुंच गया है। नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) ने दिल्ली हाईकोर्ट में जनहित याचिका (PIL) दाखिल कर OSM प्रणाली में कथित अनियमितताओं, तकनीकी खामियों और मूल्यांकन संबंधी त्रुटियों की स्वतंत्र जांच की मांग की है। इस विवाद ने लाखों छात्रों, अभिभावकों और शिक्षा विशेषज्ञों के बीच गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं। :contentReference[oaicite:0]{index=0}
क्या है CBSE की On-Screen Marking (OSM) प्रणाली?
CBSE ने वर्ष 2026 से कक्षा 12 की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के लिए On-Screen Marking प्रणाली लागू की थी। इस व्यवस्था के तहत छात्रों की भौतिक उत्तर पुस्तिकाओं को स्कैन कर डिजिटल रूप में परीक्षकों को उपलब्ध कराया जाता है और मूल्यांकन पूरी तरह कंप्यूटर स्क्रीन पर किया जाता है। बोर्ड का दावा था कि इससे पारदर्शिता बढ़ेगी, मानवीय त्रुटियां कम होंगी और परिणाम प्रक्रिया अधिक तेज एवं सुरक्षित बनेगी। :contentReference[oaicite:1]{index=1}
CBSE ने फरवरी 2026 में इस प्रणाली की घोषणा करते हुए इसे शिक्षा क्षेत्र में डिजिटल सुधार की दिशा में बड़ा कदम बताया था। इसके लिए शिक्षकों का प्रशिक्षण, मॉक मूल्यांकन और डिजिटल मॉनिटरिंग की व्यवस्था भी की गई थी। :contentReference[oaicite:2]{index=2}
विवाद की शुरुआत कैसे हुई?
13 मई 2026 को CBSE कक्षा 12 के परिणाम घोषित होने के बाद देशभर से कई छात्रों और अभिभावकों ने मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर शिकायतें दर्ज करानी शुरू कीं। कुछ छात्रों ने आरोप लगाया कि उनकी उत्तर पुस्तिकाओं के स्कैन अस्पष्ट थे, कुछ पृष्ठ गायब दिखाई दे रहे थे तथा कई मामलों में अपेक्षा से अत्यधिक कम अंक दिए गए। इन शिकायतों ने धीरे-धीरे राष्ट्रीय स्तर का विवाद का रूप ले लिया। :contentReference[oaicite:3]{index=3}
इसके बाद सोशल मीडिया पर भी बड़ी संख्या में छात्रों ने अपनी उत्तर पुस्तिकाओं और प्राप्त अंकों को लेकर सवाल उठाए। कई शिक्षा विशेषज्ञों ने भी कहा कि इतनी बड़ी प्रणाली को एक ही वर्ष में पूर्ण रूप से लागू करने के बजाय चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाना चाहिए था। :contentReference[oaicite:4]{index=4}
NSUI ने हाईकोर्ट में क्या मांग की?
NSUI ने दिल्ली हाईकोर्ट में दायर याचिका में आरोप लगाया है कि OSM प्रणाली के तहत बड़े पैमाने पर तकनीकी खामियां और प्रशासनिक कमियां सामने आई हैं। संगठन ने अदालत से मांग की है कि इस पूरी प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच कराई जाए और छात्रों को न्याय दिलाने के लिए विशेष कदम उठाए जाएं। :contentReference[oaicite:5]{index=5}
याचिका में निम्न प्रमुख मांगें की गई हैं:
- OSM प्रणाली की स्वतंत्र जांच।
- विवादित मामलों में उत्तर पुस्तिकाओं की भौतिक जांच।
- मैनुअल पुनर्मूल्यांकन की अनुमति।
- री-वेरिफिकेशन पोर्टल की अवधि बढ़ाना।
- भविष्य के लिए डिजिटल मूल्यांकन के स्पष्ट दिशा-निर्देश।
- गलत मूल्यांकन से प्रभावित छात्रों को उचित राहत।
याचिका में यह भी कहा गया है कि यदि किसी छात्र की उत्तर पुस्तिका धुंधली, अधूरी या गलत तरीके से मूल्यांकित पाई जाती है तो उसे क्षतिपूरक अंक दिए जाएं। :contentReference[oaicite:6]{index=6}
संसदीय समिति भी कर रही है समीक्षा
मामला केवल अदालत तक सीमित नहीं है। संसद की शिक्षा संबंधी स्थायी समिति भी OSM प्रणाली से जुड़े आरोपों की समीक्षा कर रही है। हाल ही में एक छात्र, सार्थक सिद्धांत, ने समिति के सामने अपनी शिकायतें और अनुभव प्रस्तुत किए। समिति तकनीकी प्रक्रियाओं, टेंडर प्रणाली तथा मूल्यांकन व्यवस्था की जांच कर रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि संसदीय समिति और न्यायालय दोनों स्तरों पर जांच आगे बढ़ती है तो यह देश की सबसे बड़ी परीक्षा प्रणाली में महत्वपूर्ण सुधारों का कारण बन सकती है।
केंद्र सरकार की कार्रवाई
विवाद बढ़ने के बाद केंद्र सरकार ने भी गंभीर रुख अपनाया है। रिपोर्टों के अनुसार CBSE के शीर्ष अधिकारियों के स्थानांतरण के साथ-साथ OSM प्रणाली की खरीद और कार्यान्वयन प्रक्रिया की जांच शुरू कर दी गई है। वरिष्ठ अधिकारी एस. राधा चौहान को जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
सरकार यह जानने का प्रयास कर रही है कि डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली के कार्यान्वयन में कहीं प्रशासनिक या तकनीकी स्तर पर कोई चूक तो नहीं हुई।
शिक्षा मंत्री ने क्या कहा?
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने OSM प्रणाली का बचाव करते हुए इसे पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने वाला कदम बताया है। हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि नई प्रणाली के कार्यान्वयन के दौरान कुछ तकनीकी समस्याएं सामने आई हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि छात्रों की शिकायतों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा।
मंत्री का कहना है कि डिजिटल मूल्यांकन भविष्य की आवश्यकता है, लेकिन इसके सफल संचालन के लिए तकनीकी ढांचे और शिकायत निवारण प्रणाली को और मजबूत करना होगा।
CBSE का पक्ष
CBSE लगातार यह दावा करता रहा है कि On-Screen Marking प्रणाली से मूल्यांकन अधिक सटीक, पारदर्शी और त्रुटिरहित हुआ है। बोर्ड के अनुसार डिजिटल मूल्यांकन के कारण जोड़-घटाव की गलतियां लगभग समाप्त हो गई हैं और परीक्षकों की निगरानी पहले की तुलना में बेहतर हुई है।
बोर्ड का यह भी कहना है कि नई प्रणाली से मूल्यांकन की गति बढ़ी है और भविष्य में इसे और अधिक उन्नत बनाया जाएगा। हालांकि छात्रों की शिकायतों के बाद CBSE ने पुनर्मूल्यांकन और शिकायत निवारण व्यवस्था को सक्रिय रखा है।
क्या OSM वास्तव में आवश्यक था?
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि देश में हर वर्ष लाखों उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन किया जाता है। ऐसे में डिजिटल प्रणाली की ओर बढ़ना स्वाभाविक था। दुनिया के कई देशों और विश्वविद्यालयों में डिजिटल मूल्यांकन पहले से अपनाया जा चुका है। इसलिए OSM की अवधारणा गलत नहीं मानी जा रही है।
विवाद का मुख्य कारण तकनीक नहीं बल्कि उसके कार्यान्वयन की गति और गुणवत्ता है। कई विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाता और पहले सीमित स्तर पर परीक्षण किया जाता तो वर्तमान विवाद से बचा जा सकता था।
छात्रों पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
इस विवाद का सबसे बड़ा प्रभाव उन लाखों छात्रों पर पड़ सकता है जिन्होंने 2026 की बोर्ड परीक्षा दी है। उच्च शिक्षा में प्रवेश, प्रतियोगी परीक्षाओं की पात्रता और करियर की दिशा अक्सर बोर्ड परीक्षा के अंकों पर निर्भर करती है। इसलिए मूल्यांकन प्रक्रिया में पारदर्शिता और विश्वसनीयता अत्यंत महत्वपूर्ण है।
यदि अदालत या जांच समितियां किसी प्रकार की व्यापक त्रुटि पाती हैं, तो पुनर्मूल्यांकन, विशेष सत्यापन या अन्य सुधारात्मक कदम उठाए जा सकते हैं। वहीं यदि प्रणाली को सही पाया जाता है तो यह भारत में डिजिटल मूल्यांकन के भविष्य को मजबूत आधार प्रदान करेगी।
निष्कर्ष
CBSE की On-Screen Marking प्रणाली को लेकर शुरू हुआ विवाद केवल एक परीक्षा परिणाम का मुद्दा नहीं रह गया है। यह भारत की शिक्षा व्यवस्था में डिजिटल परिवर्तन, पारदर्शिता और जवाबदेही की बड़ी बहस का हिस्सा बन चुका है। दिल्ली हाईकोर्ट, संसदीय समिति और केंद्र सरकार की जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि OSM प्रणाली में वास्तव में तकनीकी खामियां थीं या यह केवल संक्रमण काल की सामान्य चुनौतियां थीं। फिलहाल लाखों छात्र और अभिभावक इस मामले के अगले घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।
— RI News Desk |



