
प्रकाशन तिथि: 31 मई 2026 | समय: 03:30 PM IST
कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति एक बार फिर हिंसा और टकराव के केंद्र में आ गई है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी पर दक्षिण 24 परगना के सोनारपुर क्षेत्र में उस समय हमला हुआ जब वह कथित चुनाव बाद हिंसा से प्रभावित परिवारों से मिलने पहुंचे थे। घटना के दौरान प्रदर्शनकारियों ने उनके काफिले को घेर लिया और अंडे, पत्थर तथा चप्पलें फेंकी गईं। कई वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं।
सोनारपुर में अचानक भड़का विरोध
रिपोर्टों के अनुसार अभिषेक बनर्जी अपने समर्थकों के साथ सोनारपुर पहुंचे थे। इसी दौरान बड़ी संख्या में स्थानीय लोग और विरोध प्रदर्शन कर रहे समूह वहां इकट्ठा हो गए। भीड़ ने “चोर-चोर” के नारे लगाए और उनके काफिले की ओर अंडे तथा पत्थर फेंके। स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि सुरक्षा कर्मियों को उन्हें घेरे में लेकर बाहर निकालना पड़ा।
अभिषेक बनर्जी ने लगाया हत्या के प्रयास का आरोप
हमले के बाद अभिषेक बनर्जी ने दावा किया कि यह केवल विरोध प्रदर्शन नहीं था बल्कि उनकी हत्या की कोशिश की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि हमला पूर्व नियोजित था और पर्याप्त पुलिस सुरक्षा उपलब्ध नहीं कराई गई। TMC ने भी इस घटना को लोकतंत्र पर हमला बताते हुए राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन की घोषणा की।
ममता बनर्जी का बड़ा आरोप
हमले के बाद अभिषेक बनर्जी को कोलकाता के अस्पताल ले जाया गया। इसके बाद तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि राजनीतिक दबाव के कारण अस्पताल प्रशासन उचित तरीके से भर्ती और उपचार करने में हिचकिचा रहा था। उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम को राजनीतिक प्रतिशोध से जोड़ते हुए भाजपा पर निशाना साधा।
अगले ही दिन सांसद कल्याण बनर्जी भी विवाद में
घटना के अगले दिन TMC सांसद कल्याण बनर्जी ने भी दावा किया कि हुगली जिले के चंदीतला पुलिस स्टेशन के बाहर उन्हें भीड़ ने घेर लिया और उनके सिर पर चोट पहुंची। उन्होंने आरोप लगाया कि विरोध प्रदर्शन कर रहे लोगों ने हमला किया और यह राजनीतिक हिंसा की श्रृंखला का हिस्सा है।
चुनाव परिणाम के बाद बदलता बंगाल का राजनीतिक माहौल
हालिया विधानसभा चुनाव के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। लंबे समय तक सत्ता में रहने वाली तृणमूल कांग्रेस को सत्ता से बाहर होना पड़ा और भाजपा ने राज्य में नई सरकार बनाई। चुनाव परिणाम के बाद विभिन्न क्षेत्रों में राजनीतिक तनाव, विरोध प्रदर्शन और हिंसा की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं।
विश्लेषण: जनता का गुस्सा या राजनीतिक संघर्ष?
सोनारपुर की घटना केवल एक स्थानीय विरोध नहीं मानी जा रही। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह पश्चिम बंगाल में तेजी से बदल रहे राजनीतिक समीकरणों का संकेत है। एक ओर TMC इसे लोकतंत्र और विपक्षी नेताओं पर हमला बता रही है, वहीं भाजपा समर्थक इसे जनता के आक्रोश का परिणाम बता रहे हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार यदि राज्य में राजनीतिक ध्रुवीकरण इसी प्रकार बढ़ता रहा तो आने वाले महीनों में और बड़े टकराव देखने को मिल सकते हैं। इससे प्रशासनिक स्थिरता, निवेश माहौल और सामाजिक सौहार्द पर भी प्रभाव पड़ सकता है।
राष्ट्रीय राजनीति पर भी पड़ सकता है असर
अभिषेक बनर्जी को TMC का सबसे प्रभावशाली युवा चेहरा माना जाता है। उन पर हुआ हमला केवल राज्य स्तरीय घटना नहीं माना जा रहा बल्कि इसका प्रभाव राष्ट्रीय विपक्षी राजनीति और केंद्र-विरोधी गठबंधनों पर भी पड़ सकता है। विभिन्न विपक्षी दलों ने इस घटना की निंदा करते हुए राजनीतिक हिंसा के खिलाफ बयान जारी किए हैं।
निष्कर्ष
सोनारपुर में अभिषेक बनर्जी पर हुआ हमला पश्चिम बंगाल की वर्तमान राजनीतिक स्थिति की गंभीरता को दर्शाता है। चुनाव बाद हिंसा, राजनीतिक ध्रुवीकरण और बढ़ते जनाक्रोश के बीच राज्य की राजनीति नए दौर में प्रवेश करती दिखाई दे रही है। आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट, राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और प्रशासनिक कार्रवाई इस मामले को और अधिक महत्वपूर्ण बना सकती हैं।
— RI News Desk



