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भारत ने पेट्रोल, डीजल और एटीएफ पर निर्यात शुल्क घटाया, 1 जून से नई दरें लागू

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नई दिल्ली | 31 मई 2026 — भारत सरकार ने पेट्रोल, डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) पर लगने वाले निर्यात शुल्क में कटौती करने का फैसला किया है। नई दरें 1 जून 2026 से लागू होंगी। सरकार ने शनिवार को जारी अधिसूचना में यह जानकारी दी।

नई व्यवस्था के तहत पेट्रोल पर निर्यात शुल्क 1.5 रुपये प्रति लीटर निर्धारित किया गया है। वहीं डीजल पर निर्यात शुल्क 13.5 रुपये प्रति लीटर और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) पर 9.5 रुपये प्रति लीटर तय किया गया है।

सरकार के अनुसार इन शुल्कों की समीक्षा प्रत्येक 15 दिन में की जाती है। शुल्क निर्धारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल, पेट्रोल, डीजल और एटीएफ की औसत कीमतों के आधार पर किया जाता है। पिछले पखवाड़े के दौरान वैश्विक ऊर्जा बाजार में कीमतों में हुए बदलाव को ध्यान में रखते हुए नई दरें तय की गई हैं।

क्या हैं नई निर्यात शुल्क दरें?

  • पेट्रोल: 1.5 रुपये प्रति लीटर
  • डीजल: 13.5 रुपये प्रति लीटर
  • एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF): 9.5 रुपये प्रति लीटर

ऊर्जा क्षेत्र को मिल सकती है राहत

विशेषज्ञों का मानना है कि निर्यात शुल्क में कटौती से भारतीय रिफाइनरियों को राहत मिलेगी। इससे पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा मिल सकता है और भारतीय कंपनियों की अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धात्मकता मजबूत होगी।

भारत दुनिया के प्रमुख रिफाइनिंग केंद्रों में से एक है। देश की कई बड़ी रिफाइनरियां एशिया, अफ्रीका और यूरोप के बाजारों में पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात करती हैं। निर्यात शुल्क में कमी से इन कंपनियों के मार्जिन में सुधार की संभावना है।

अंतरराष्ट्रीय कीमतों पर आधारित है व्यवस्था

सरकार द्वारा लागू यह तंत्र वैश्विक तेल कीमतों के उतार-चढ़ाव के अनुसार स्वतः समायोजन की व्यवस्था प्रदान करता है। जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें बढ़ती हैं तो शुल्क में संशोधन किया जाता है ताकि घरेलू बाजार और सरकारी राजस्व के बीच संतुलन बनाए रखा जा सके।

विश्लेषण

निर्यात शुल्क में यह कटौती ऐसे समय आई है जब वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है। भारत की प्रमुख रिफाइनिंग कंपनियों के लिए यह कदम सकारात्मक माना जा रहा है। इससे निर्यात आय बढ़ने और विदेशी बाजारों में भारतीय उत्पादों की मांग मजबूत होने की संभावना है।

हाल के महीनों में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। ऐसे में सरकार का यह निर्णय भारतीय ऊर्जा कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने में मदद कर सकता है।

प्रभाव

  • पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात को प्रोत्साहन मिलेगा।
  • रिफाइनिंग कंपनियों की लाभप्रदता में सुधार संभव।
  • विदेशी मुद्रा आय बढ़ने की संभावना।
  • ऊर्जा क्षेत्र में निवेश और उत्पादन गतिविधियों को बल मिल सकता है।
  • भारतीय उत्पादों की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता मजबूत हो सकती है।

स्रोत: Reuters

अपडेट: 31 मई 2026 | 07:00 AM IST

— Saranash Kumar | National & Business Correspondent, Lucknow

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