निफ्टी–सेंसेक्स दिसंबर 2025: सुस्त क्लोज़ के बाद 2026 में बाजार क्यों दे सकता है बेहतर रिटर्न

RI News Desk
26 दिसंबर 2025

रिपोर्ट | विश्लेषण,सारांश राय

निफ्टी सेंसेक्स दिसंबर 2025 का बाजार विश्लेषण और 2026 आउटलुक
दिसंबर की सुस्ती के बाद भारतीय शेयर बाजार 2026 में नई दिशा की ओर बढ़ता हुआ।

निफ्टी–सेंसेक्स दिसंबर 2025 का विश्लेषण और 2026 का बाजार आउटलुक

दिसंबर 2025 में भारतीय शेयर बाजार सीमित दायरे में रहा। निफ्टी और सेंसेक्स महीने के अंत में हल्की गिरावट के साथ बंद हुए। वर्ष के अंत में कम ट्रेडिंग वॉल्यूम, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की लगातार बिकवाली और वैश्विक बाजारों से मिले मिश्रित संकेतों ने बाजार की गति को दबाव में रखा। इसके बावजूद घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) की निरंतर खरीदारी ने बाजार को स्थिर आधार प्रदान किया। यह सुस्ती किसी संरचनात्मक कमजोरी का संकेत नहीं, बल्कि 2026 से पहले का संतुलन चरण मानी जा रही है।

दिसंबर की शुरुआत में निफ्टी 50 ने लगभग 26,325 का स्तर छुआ था, लेकिन महीने के अंतिम कारोबारी दिन 26 दिसंबर 2025 को यह 26,042.30 पर बंद हुआ। इस दौरान निफ्टी में लगभग 0.3 से 0.5 प्रतिशत की हल्की गिरावट दर्ज की गई। सेंसेक्स भी इसी रुझान पर रहा और 26 दिसंबर को 85,041.45 पर बंद हुआ, जो दैनिक आधार पर करीब 0.43 प्रतिशत की गिरावट को दर्शाता है। पूरे महीने में सेंसेक्स का प्रदर्शन लगभग 0.5 से 0.8 प्रतिशत नीचे रहा।

इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि दिसंबर 2025 में बाजार न तो तेज़ी के चरण में था और न ही बड़ी गिरावट के दौर में, बल्कि एक सीमित दायरे में ठहरा रहा।

बाजार पर दबाव की पहली प्रमुख वजह वर्ष के अंत में ट्रेडिंग वॉल्यूम का कम होना रहा। वैश्विक और घरेलू स्तर पर निवेशक वर्षांत अवकाश के कारण सतर्क रहे, जिससे नवंबर की तुलना में औसत दैनिक कारोबार घटा और बाजार में निर्णायक दिशा नहीं बन पाई।

दूसरी महत्वपूर्ण वजह विदेशी संस्थागत निवेशकों की लगातार बिकवाली रही। वर्ष 2025 में FIIs द्वारा रिकॉर्ड स्तर पर पूंजी निकासी की गई। वैश्विक पोर्टफोलियो री-बैलेंसिंग और अंतरराष्ट्रीय जोखिम प्रबंधन के चलते यह दबाव दिसंबर में भी बना रहा।

वैश्विक बाजारों से मिले मिश्रित संकेतों ने भी घरेलू धारणा को प्रभावित किया। अमेरिका और यूरोप में आर्थिक संकेतों को लेकर अनिश्चितता और हॉलिडे मोड के कारण गतिविधियां सीमित रहीं, जिसका असर भारतीय शेयर बाजार पर भी दिखाई दिया।

सेक्टर स्तर पर दिसंबर में IT, फाइनेंशियल और ऑटो सेक्टर्स में दबाव देखने को मिला। इसके विपरीत मेटल्स, डिफेंस और कुछ चुनिंदा कंज्यूमर स्टॉक्स ने बाजार को आंशिक सहारा दिया, जिससे व्यापक गिरावट टल गई।

पूरे वर्ष 2025 की बात करें तो निफ्टी 50 ने लगभग 8 से 9.5 प्रतिशत का रिटर्न दिया, जबकि सेंसेक्स करीब 8 से 9 प्रतिशत ऊपर रहा। प्रदर्शन सकारात्मक रहा, लेकिन इसी अवधि में गोल्ड जैसे वैकल्पिक एसेट्स के मुकाबले इक्विटी बाजार पीछे रहा। वर्ष भर में बड़े शेयरों ने बाजार को संभाले रखा, जबकि मिड और स्मॉलकैप सेगमेंट अपेक्षाकृत कमजोर बना रहा।

दिसंबर की सुस्ती के बीच घरेलू संस्थागत निवेशकों की भूमिका निर्णायक रही। DIIs की निरंतर खरीदारी, SIP और म्यूचुअल फंड के माध्यम से आने वाली घरेलू लिक्विडिटी ने बाजार को स्थिर बनाए रखा। यही घरेलू आधार 2026 के लिए सबसे मजबूत सहारा माना जा रहा है।

आगे की ओर देखें तो बाजार विशेषज्ञों के अनुसार 2026 भारतीय शेयर बाजार के लिए बेहतर संभावनाओं वाला वर्ष हो सकता है। FY27 में अर्निंग्स ग्रोथ 14 से 17 प्रतिशत के दायरे में रहने का अनुमान है। GDP ग्रोथ 6.5 से 7 प्रतिशत के आसपास रहने और महंगाई के नियंत्रण में रहने से नीतिगत समर्थन की संभावना बनी हुई है।

संभावित रेट कट्स, कैपेक्स में तेजी और वैश्विक करेक्शन के बाद विदेशी निवेशकों की संभावित वापसी जैसे कारक 2026 में बाजार को नई दिशा दे सकते हैं। विशेषज्ञों का आकलन है कि वर्ष के अंत तक निफ्टी 28,500 से 29,120 के स्तर की ओर बढ़ सकता है, हालांकि शुरुआती महीनों में बाजार सीमित दायरे में रह सकता है।

निवेशकों के लिए संकेत स्पष्ट हैं कि दिसंबर की कमजोरी को घबराहट के बजाय अवसर के रूप में देखा जाना चाहिए। लंबी अवधि के निवेशक चरणबद्ध तरीके से गुणवत्ता वाले शेयरों में निवेश कर सकते हैं। अनुशासन, धैर्य और सही स्टॉक चयन के साथ 2026 में डबल-डिजिट रिटर्न की संभावना मजबूत मानी जा रही है।

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