नई दिल्ली, 15 मई 2026। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल के बीच देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी कर दी गई है। शुक्रवार सुबह 6 बजे से नई दरें लागू हो गईं।
दिल्ली में पेट्रोल की कीमत में 3.14 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि हुई है, जिसके बाद नई कीमत 97.77 रुपये प्रति लीटर पहुंच गई है। वहीं डीजल 3.11 रुपये महंगा होकर 90.67 रुपये प्रति लीटर हो गया है। यह वर्ष 2022 के बाद पहली बार है जब पेट्रोल और डीजल की कीमतों में इतनी बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
क्यों बढ़े पेट्रोल और डीजल के दाम?
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हुई है। कई तेल टैंकर मार्गों पर सुरक्षा संकट पैदा होने से कच्चे तेल की लागत बढ़ी है।
विशेषज्ञों के अनुसार, भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर घरेलू बाजार पर पड़ता है। पिछले कुछ दिनों से तेल कंपनियां लगातार संकेत दे रही थीं कि यदि कच्चे तेल की कीमतें नियंत्रित नहीं हुईं तो उपभोक्ताओं पर बोझ बढ़ सकता है।
आम लोगों पर क्या होगा असर?
पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि का असर केवल वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहेगा। परिवहन लागत बढ़ने से खाद्य पदार्थों, सब्जियों, दूध और रोजमर्रा की वस्तुओं के दाम भी प्रभावित हो सकते हैं।
विशेषज्ञ मानते हैं कि डीजल महंगा होने से ट्रांसपोर्ट सेक्टर पर दबाव बढ़ेगा, जिसका असर बाजार में महंगाई के रूप में दिखाई देगा। बस, ट्रक और टैक्सी किराए में भी वृद्धि संभव मानी जा रही है।
राज्यों में अलग-अलग होंगी कीमतें
भारत में पेट्रोल और डीजल की अंतिम कीमतें राज्य सरकारों द्वारा लगाए जाने वाले वैट और स्थानीय टैक्स पर निर्भर करती हैं। इसलिए अलग-अलग राज्यों और शहरों में कीमतों में अंतर देखने को मिलेगा।
मुंबई, चेन्नई, कोलकाता और बेंगलुरु जैसे महानगरों में कीमतें दिल्ली से अधिक रहने की संभावना है।
सरकार के सामने नई चुनौती
यह बढ़ोतरी ऐसे समय हुई है जब महंगाई पहले से ही एक बड़ा आर्थिक मुद्दा बनी हुई है। सरकार पर अब एक्साइज ड्यूटी में कटौती या वैट कम करने का दबाव बढ़ सकता है।
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया का संकट लंबा चलता है, तो आने वाले सप्ताहों में कच्चे तेल की कीमतें और बढ़ सकती हैं। ऐसे में तेल कंपनियां भविष्य में फिर कीमतों की समीक्षा कर सकती हैं।
वैश्विक बाजार पर नजर
ब्रेंट क्रूड की कीमतों में हाल के दिनों में लगातार तेजी दर्ज की गई है। अंतरराष्ट्रीय निवेशक पश्चिम एशिया की स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। यदि आपूर्ति बाधित होती है तो वैश्विक ऊर्जा बाजार में और अस्थिरता आ सकती है।
भारत जैसे आयात-निर्भर देशों के लिए यह स्थिति आर्थिक दबाव बढ़ाने वाली मानी जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि कच्चा तेल लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बना रहा तो महंगाई और वित्तीय घाटे पर भी असर पड़ सकता है।
Source: Google Preferred / Jagran Report
— RI News Desk
