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बंगाल की सत्ता में 75 साल का सबसे बड़ा बदलाव! कांग्रेस-वाम-ममता के बाद अब भाजपा का उदय

बंगाल की सत्ता में 75 साल का सबसे बड़ा बदलाव! कांग्रेस-वाम-ममता के बाद अब भाजपा का उदय

पश्चिम बंगाल की राजनीति ने 2026 में एक ऐतिहासिक मोड़ ले लिया है। दशकों तक कांग्रेस, फिर वाम दलों और उसके बाद तृणमूल कांग्रेस के प्रभुत्व वाले बंगाल में अब भाजपा का प्रभाव तेजी से बढ़ता दिखाई दे रहा है। राज्य की सत्ता में यह बदलाव केवल राजनीतिक परिवर्तन नहीं बल्कि सामाजिक और वैचारिक बदलाव का संकेत भी माना जा रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बंगाल की राजनीति में यह परिवर्तन पिछले 75 वर्षों की सबसे बड़ी राजनीतिक पुनर्रचना के रूप में देखा जा सकता है। भाजपा ने लगातार अपने संगठन, हिंदुत्व आधारित राजनीति और जमीनी रणनीति के जरिए राज्य में मजबूत पकड़ बनाई है।

कांग्रेस से शुरू हुआ सत्ता का दौर

स्वतंत्रता के बाद पश्चिम बंगाल में लंबे समय तक कांग्रेस का दबदबा रहा। राज्य की राजनीति राष्ट्रीय मुद्दों और कांग्रेस नेतृत्व के इर्द-गिर्द घूमती रही।

वाम दलों का तीन दशक लंबा शासन

1977 में वाम मोर्चा सत्ता में आया और लगभग 34 वर्षों तक बंगाल की राजनीति पर उसका नियंत्रण बना रहा। भूमि सुधार और मजदूर राजनीति के कारण वाम दलों को ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ा समर्थन मिला।

ममता बनर्जी का उदय

2011 में ममता बनर्जी ने वाम शासन को समाप्त करते हुए तृणमूल कांग्रेस को सत्ता में पहुंचाया। इसके बाद बंगाल की राजनीति पूरी तरह क्षेत्रीय नेतृत्व केंद्रित हो गई।

अब भाजपा का तेजी से बढ़ता प्रभाव

पिछले कुछ वर्षों में भाजपा ने बंगाल में अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत की है। लोकसभा और विधानसभा चुनावों में पार्टी के वोट प्रतिशत और सीटों में लगातार वृद्धि देखी गई। शुभेंदु अधिकारी जैसे नेताओं के उभार ने भाजपा को नई ताकत दी है।

विश्लेषण

विशेषज्ञ मानते हैं कि बंगाल की राजनीति अब केवल क्षेत्रीय मुद्दों तक सीमित नहीं रही। राष्ट्रीय राजनीति, हिंदुत्व, पहचान की राजनीति और केंद्रीय नेतृत्व का प्रभाव तेजी से बढ़ रहा है। भाजपा इसी बदलाव का सबसे बड़ा लाभ उठाने की कोशिश कर रही है।

प्रभाव

यदि भाजपा बंगाल में स्थायी राजनीतिक आधार बनाने में सफल रहती है तो इसका असर राष्ट्रीय राजनीति पर भी दिखाई दे सकता है। इससे पूर्वी भारत की राजनीतिक दिशा बदलने की संभावना बढ़ जाएगी।

— RI News National Desk

इनपुट: अमर उजाला फीड, राजनीतिक अभिलेख और एजेंसी रिपोर्ट

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