1️⃣ ईरान में हालात बेकाबू: विरोध प्रदर्शन, इंटरनेट बंदी और हिंसा से वैश्विक चिंता

ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शन तीसरे सप्ताह में भी जारी हैं। कई शहरों में सुरक्षा बलों की कार्रवाई तेज़ हुई है, इंटरनेट सेवाएं आंशिक रूप से बंद की गई हैं और हिंसा में बड़ी संख्या में लोगों की मौत की खबरें सामने आई हैं। हालात 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद सबसे गंभीर माने जा रहे हैं।
विश्लेषण और असर:
ईरान का यह संकट केवल आंतरिक राजनीति तक सीमित नहीं है। मध्य-पूर्व में अस्थिरता बढ़ने से कच्चे तेल की आपूर्ति और कीमतों पर असर पड़ सकता है, जिसका सीधा प्रभाव भारत जैसे तेल आयातक देशों पर पड़ेगा। मानवाधिकार उल्लंघन के आरोपों के कारण ईरान पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ेगा। वैश्विक निवेशकों की धारणा कमजोर होने से शेयर बाजारों और करेंसी मार्केट में अस्थिरता आ सकती है। यदि हालात जल्द नियंत्रित नहीं हुए, तो यह संकट वैश्विक राजनीति और ऊर्जा सुरक्षा के लिए लंबे समय तक जोखिम बना रह सकता है।
स्रोत:
BBC News – https://www.bbc.com/news
Reuters – https://www.reuters.com
— RI News Desk | International | 13/01/2026
2️⃣ ट्रंप का बड़ा फैसला: ईरान से व्यापार करने वाले देशों पर 25% टैरिफ लागू 
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान से व्यापार करने वाले देशों पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाने का फैसला किया है। यह कदम तत्काल प्रभाव से लागू माना जा रहा है और इससे वैश्विक व्यापार माहौल में नई अनिश्चितता पैदा हो सकती है।
विश्लेषण और असर:
यह फैसला वैश्विक स्तर पर ट्रेड टेंशन को और गहरा सकता है। पहले से ही रूस, चीन और ईरान से जुड़े प्रतिबंध अंतरराष्ट्रीय व्यापार को प्रभावित कर रहे हैं। भारत के लिए यह स्थिति संवेदनशील है, क्योंकि ऊर्जा आयात और कूटनीतिक संतुलन दोनों पर असर पड़ सकता है। टैरिफ के चलते तेल की कीमतों में उछाल आने से महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है। हालांकि, भारत के पास वैकल्पिक आपूर्ति स्रोत और कूटनीतिक विकल्प मौजूद हैं, जिससे संभावित नुकसान को कुछ हद तक सीमित किया जा सकता है।
स्रोत:
Reuters – https://www.reuters.com
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