ड्रग-फ्री इंडिया: गृह मंत्री अमित शाह ने 3 साल का राष्ट्रीय मिशन घोषित किया 
डेस्क: RI News | नई दिल्ली
दिनांक: 10 जनवरी 2026
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने देश को नशा-मुक्त बनाने के उद्देश्य से
तीन वर्षों के लिए एक व्यापक राष्ट्रीय मिशन की घोषणा की है।
इस मिशन के अंतर्गत सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को
31 मार्च 2026 तक अपना एंटी-ड्रग रोडमैप केंद्र सरकार को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।
गृह मंत्रालय के अनुसार, यह अभियान केवल पुलिस कार्रवाई तक सीमित नहीं होगा,
बल्कि इसमें नशा रोकथाम, पुनर्वास, जन-जागरूकता और प्रशासनिक समन्वय को समान रूप से शामिल किया जाएगा।
विश्लेषण:
भारत में नशे की समस्या बीते एक दशक में गंभीर रूप ले चुकी है,
खासकर सीमावर्ती राज्यों और महानगरों में।
ड्रग्स केवल स्वास्थ्य संकट नहीं बल्कि सामाजिक विघटन और अपराध का भी कारण बन रहे हैं।
इस मिशन की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि केंद्र ने पहली बार राज्यों को
समयबद्ध और जवाबदेह ढांचे में बांधने का प्रयास किया है।
हालांकि, यह पहल तभी सफल होगी जब राज्य सरकारें राजनीतिक इच्छाशक्ति
और प्रशासनिक ईमानदारी के साथ काम करें।
प्रभाव:
यदि यह मिशन प्रभावी ढंग से लागू हुआ तो युवा पीढ़ी को नशे की गिरफ्त से
बचाने में बड़ी सफलता मिल सकती है।
इससे स्वास्थ्य व्यवस्था पर दबाव घटेगा,
अपराध दर में कमी आएगी और सामाजिक स्थिरता मजबूत होगी।
असफलता की स्थिति में यह अभियान केवल एक सरकारी घोषणा बनकर रह सकता है।
Source:
ANI News
पीएम मोदी 10–11 जनवरी को सोमनाथ दौरे पर, ‘स्वाभिमान पर्व’ में होंगे शामिल

डेस्क: RI News | गुजरात
दिनांक: 10 जनवरी 2026
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 10 और 11 जनवरी को गुजरात के सोमनाथ दौरे पर रहेंगे।
इस दौरान वे ‘स्वाभिमान पर्व’ में भाग लेंगे,
जहां भारतीय संस्कृति, सभ्यता और राष्ट्रीय आत्मसम्मान की रक्षा करने वाले
व्यक्तित्वों को सम्मानित किया जाएगा।
सोमनाथ मंदिर ऐतिहासिक रूप से भारतीय अस्मिता और पुनर्निर्माण का प्रतीक रहा है,
जिसके कारण इस आयोजन को विशेष महत्व दिया जा रहा है।
विश्लेषण:
प्रधानमंत्री का यह दौरा केवल धार्मिक या सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं है,
बल्कि इसके गहरे राजनीतिक और सामाजिक संदेश भी हैं।
स्वाभिमान पर्व के माध्यम से सरकार
राष्ट्रीय पहचान, सांस्कृतिक निरंतरता और आत्मगौरव को
वर्तमान पीढ़ी से जोड़ने का प्रयास कर रही है।
आलोचक इसे वैचारिक राजनीति के रूप में देखते हैं,
जबकि समर्थक इसे सांस्कृतिक पुनर्जागरण का आवश्यक कदम मानते हैं।
प्रभाव:
इस प्रकार के आयोजनों से समाज में सांस्कृतिक चेतना मजबूत होती है
और युवाओं में ऐतिहासिक जुड़ाव बढ़ता है।
हालांकि, सरकार के लिए यह आवश्यक होगा कि
सांस्कृतिक प्रतीकों के साथ-साथ
शिक्षा, रोजगार और विकास के मुद्दों पर भी समान ध्यान दिया जाए।
Source:
ANI / Times of India
भीषण ठंड का कहर: उत्तर भारत में 10 जनवरी तक स्कूल बंद, बदला गया समय 
डेस्क: RI News | उत्तर भारत
दिनांक: 10 जनवरी 2026
उत्तर भारत में जारी कड़ाके की ठंड और घने कोहरे के कारण
उत्तर प्रदेश, दिल्ली, बिहार सहित कई राज्यों में
स्कूलों को 10 जनवरी तक बंद रखने या
स्कूल समय में बदलाव के आदेश जारी किए गए हैं।
लखनऊ, नोएडा और गाजियाबाद जैसे शहरों में
कक्षा 1 से 8 तक स्कूल बंद हैं,
जबकि कक्षा 9 से 12 तक की कक्षाएं
सुबह 10 बजे से दोपहर 3 बजे तक संचालित हो रही हैं।
विश्लेषण:
हर साल सर्दियों में स्कूल बंद करना अब अस्थायी समाधान बन चुका है।
जलवायु परिवर्तन के कारण ठंड की तीव्रता और अवधि बढ़ रही है,
जिसका सीधा असर शिक्षा व्यवस्था पर पड़ रहा है।
ऑनलाइन शिक्षा अभी भी ग्रामीण और गरीब तबकों तक
पूरी तरह नहीं पहुंच पाई है,
जिससे शिक्षा में असमानता और गहरी होती जा रही है।
प्रभाव:
स्कूल बंद रहने से बच्चों के स्वास्थ्य की रक्षा तो होती है,
लेकिन पढ़ाई बाधित होने का खतरा भी बना रहता है।
लंबे समय तक ऐसी स्थिति रहने पर
परीक्षा कार्यक्रम और शैक्षणिक गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।
सरकार के लिए यह संकेत है कि
आपदा-प्रबंधन और शिक्षा नीति में दीर्घकालिक समाधान जरूरी हैं।
Source:
Amar Ujala
Navbharat Times


