धर्मदूत स्वामी हरिओम जी महाराज ने दी गहन आध्यात्मिक व्याख्या
लऊवाडीह, गाज़ीपुर — श्रीमद्भागवत कथा के दिव्य अनुष्ठान के दूसरे दिन धर्मदूत स्वामी हरिओम जी महाराज ने अपने मधुर वचनों और गूढ़ आध्यात्मिक ज्ञान से श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कथा स्थल पर सुबह से ही भक्तों का आगमन जारी रहा और वातावरण “राधे–राधे” एवं “हरी बोल” के जयकारों से गूंज उठा।
स्वामी जी ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं, भक्ति की महिमा और जीवन में धर्म के वास्तविक स्वरूप पर विस्तृत प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि—
“भागवत केवल ग्रंथ नहीं, बल्कि मनुष्य जीवन को पवित्र, सरल व सार्थक बनाने का मार्ग है।”
कथा के दौरान संगीत, भजन और भक्तिभाव से पूरा पंडाल एक दिव्य ऊर्जा से भर उठा। स्थानीय ग्रामीणों एवं आस-पास के गाँवों से बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।
स्वामी जी ने समाज में प्रेम, करुणा और नैतिकता को सर्वोच्च धर्म बताते हुए सभी को मिल-जुलकर समाज निर्माण में योगदान देने का संदेश दिया।
कल कथा के तीसरे दिन श्रीकृष्ण के जीवन के महत्वपूर्ण प्रसंगों का वर्णन किया जाएगा।
