औरैया: देश की सीमाओं की रक्षा करने वाले एक पूर्व सैन्य अधिकारी ने मृत्यु के बाद भी समाज सेवा की ऐसी मिसाल पेश की, जिसने हर किसी को भावुक कर दिया। कानपुर निवासी सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी मेजर दिनेश चंद्र गुप्ता की पार्थिव देह को उनके 18 वर्ष पुराने संकल्प के अनुसार मेडिकल छात्रों के अध्ययन हेतु औरैया मेडिकल कॉलेज को समर्पित कर दिया गया।
युग दधीचि देहदान अभियान के माध्यम से कानपुर से पार्थिव शरीर को चिचौली स्थित मेडिकल कॉलेज लाया गया, जहां डॉक्टरों, मेडिकल छात्रों और सैन्य अधिकारियों ने पूरे सम्मान और श्रद्धा के साथ उन्हें अंतिम सलामी दी। कॉलेज परिसर में उपस्थित कई लोगों की आंखें नम दिखाई दीं।
18 साल पहले लिया था समाजसेवा का संकल्प
जानकारी के अनुसार, गीता विहार यशोदा नगर कानपुर निवासी 80 वर्षीय मेजर दिनेश चंद्र गुप्ता ने फरवरी 2008 में देहदान का संकल्प लिया था। 19 मई 2026 को एक निजी अस्पताल में उनके निधन के बाद उनके पुत्र प्रवीन गुप्ता ने युग दधीचि देहदान अभियान से संपर्क कर पिता की अंतिम इच्छा पूरी करने का आग्रह किया।
अभियान प्रमुख मनोज सेंगर और माधवी सेंगर ने आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कर पार्थिव देह को औरैया मेडिकल कॉलेज पहुंचाया। मेडिकल कॉलेज के एनाटॉमी विभाग की प्रमुख डॉ. मेधा दास और अन्य चिकित्सकों ने सम्मानपूर्वक पार्थिव शरीर स्वीकार किया।
डॉक्टरों और छात्रों ने दी श्रद्धांजलि
मेडिकल कॉलेज पहुंचने से पहले स्थानीय सैन्य अधिकारियों ने अपने पूर्व अधिकारी को पुष्पचक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। वैदिक मंत्रोच्चार और पुष्पांजलि के साथ परिवार ने उन्हें अंतिम विदाई दी। मेडिकल छात्रों ने भी इस देहदान को चिकित्सा शिक्षा और मानवता के लिए अमूल्य योगदान बताया।
युग दधीचि देहदान अभियान के अनुसार, यह उनकी 322वीं सफल देहदान प्रक्रिया रही। अभियान से अब तक प्रदेश में चार हजार से अधिक लोग देहदान का संकल्प ले चुके हैं।
RI News विश्लेषण
आज के समय में जहां समाज तेजी से व्यक्तिगत जीवनशैली और सीमित सोच की ओर बढ़ता दिखाई देता है, वहीं मेजर दिनेश चंद्र गुप्ता का यह निर्णय समाज को मानवता, विज्ञान और राष्ट्रसेवा का गहरा संदेश देता है। उन्होंने जीवन भर सीमा पर देश की रक्षा की और मृत्यु के बाद भी अपनी देह चिकित्सा शिक्षा के लिए समर्पित कर नई पीढ़ी के डॉक्टरों के प्रशिक्षण में योगदान दिया।
विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत में देहदान और अंगदान को लेकर जागरूकता अभी भी सीमित है। ऐसे प्रेरणादायक उदाहरण समाज में वैज्ञानिक सोच, सामाजिक संवेदनशीलता और चिकित्सा शिक्षा के महत्व को मजबूत करते हैं।
समाज पर संभावित प्रभाव
- देहदान और अंगदान के प्रति जागरूकता बढ़ सकती है।
- मेडिकल छात्रों को अध्ययन और शोध में बेहतर संसाधन मिलेंगे।
- समाज में मानवता और सेवा भावना को नई प्रेरणा मिलेगी।
- पूर्व सैनिकों के योगदान के प्रति सम्मान और बढ़ेगा।
- वैज्ञानिक सोच और सामाजिक जिम्मेदारी पर सकारात्मक चर्चा तेज हो सकती है।
मानवता और विज्ञान का संगम
मेजर दिनेश चंद्र गुप्ता की अंतिम इच्छा केवल एक व्यक्तिगत निर्णय नहीं थी, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों के लिए सेवा, त्याग और समाजहित की जीवंत मिसाल बन गई। जीवन समाप्त होने के बाद भी उनका योगदान चिकित्सा शिक्षा के माध्यम से लंबे समय तक जीवित रहेगा।
स्रोत: दैनिक जागरण, स्थानीय संवाद एवं सामाजिक संगठनों से प्राप्त जानकारी
— RI News Desk | औरैया
स्रोतः आरआई न्यूज फीड नेटवर्क (एकीकृत) | संपादक मंडल: आरआई न्यूज डेस्क (RI News Desk)
📅 प्रकाशित तिथि: 20 May 2026 को 09:12 PM बजे | गाजीपुर, उत्तर प्रदेश



