RI NEWS DESK | योगेश राय
लोकसभा ने शुक्रवार को एक अहम विधेयक — ‘हेल्थ सिक्योरिटी से नेशनल सिक्योरिटी सेस बिल’ — पास कर दिया। इसके लागू होते ही सिगरेट, पान मसाला और अन्य हानिकारक उत्पादों पर अतिरिक्त टैक्स लगेगा। सरकार का कहना है कि इस टैक्स से मिलने वाली कमाई सीधे राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने में उपयोग की जाएगी।
1. आखिर क्यों लाया गया यह नया टैक्स? — वित्त मंत्री का तर्क
कारगिल की सीख फिर याद दिलाई गई
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बिल पेश करते समय कहा कि:
- 1990 के दशक में फंड की कमी के कारण सेना के पास केवल 70–80% तक ही हथियार और गोला-बारूद उपलब्ध थे।
- कारगिल युद्ध ने साफ कर दिया कि रक्षा तैयारियों में किसी भी तरह की ढील देश को भारी पड़ सकती है।
सरकार का कहना है कि वह ऐसी गलती दोबारा होने नहीं देगी।
2. मॉडर्न वॉरफेयर के लिए विशाल फंड की जरूरत
वित्त मंत्री ने ‘मिशन सुदर्शन चक्र’ और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का जिक्र करते हुए बताया कि:
- आज के युद्ध तकनीकी होते जा रहे हैं।
- ड्रोन, एंटी-ड्रोन सिस्टम, मिसाइल नेटवर्क, साइबर डिफेंस और हाई-टेक निगरानी उपकरणों पर बड़ा निवेश जरूरी है।
इसके लिए लगातार मजबूत फंडिंग की आवश्यकता है, जिसे यह नया सेस पूरा करेगा।
3. आम जनता पर बोझ नहीं — हानिकारक वस्तुओं से ही राजस्व
सरकार के अनुसार:
- यह टैक्स रोजमर्रा की चीजों पर नहीं, बल्कि Demerit Goods (हानिकारक वस्तुएँ) जैसे सिगरेट, पान मसाला इत्यादि पर लगाया जाएगा।
- उद्देश्य है कि स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाने वाले सेक्टर से धन लेकर रक्षा तैयारियों को मजबूत किया जाए।
RI NEWS विश्लेषण: क्या यह कदम सही दिशा में है?
- भारत की सुरक्षा चुनौतियाँ अब बहुआयामी हैं — सीमा सुरक्षा से लेकर साइबर सुरक्षा तक।
- यदि हानिकारक उत्पादों से प्राप्त राजस्व सही ढंग से रक्षा क्षेत्र में उपयोग होता है, तो यह जन-स्वास्थ्य और राष्ट्रीय सुरक्षा — दोनों के लिए लाभकारी कदम माना जा सकता है।
- लेकिन सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि यह सेस आगे चलकर रोजमर्रा के उत्पादों तक न पहुँचे, ताकि आम नागरिक पर बोझ न बढ़े।
