दिसंबर 1971 की उस रात, जब ढाका चारों ओर से घिर चुका था, पाकिस्तानी सेना के कुछ पायलटों ने आत्मसमर्पण करने के बजाय हेलीकॉप्टरों के साथ बर्मा की ओर उड़ान भरी.
दिसंबर 1971 की उस रात, जब ढाका चारों ओर से घिर चुका था, पाकिस्तानी सेना के कुछ पायलटों ने आत्मसमर्पण करने के बजाय हेलीकॉप्टरों के साथ बर्मा की ओर उड़ान भरी.