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तमिलनाडु में तुरंत जाति आधारित जनगणना कराई जाए: पीएमके नेता अंबुमणि रामदास ने मुख्यमंत्री विजय से की मांग

तमिलनाडु में तुरंत जाति आधारित जनगणना कराई जाए: पीएमके नेता अंबुमणि रामदास ने मुख्यमंत्री विजय से की मांग - Uncategor...

चेन्नई, 9 जून 2026 | RI News

पट्टाली मक्कल काची (PMK) के नेता डॉ. अंबुमणि रामदास ने मंगलवार को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय से राज्य में तत्काल जाति आधारित जनगणना कराने की मांग की। रामदास ने सचिवालय में मुख्यमंत्री से मुलाकात कर उन्हें एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें सामाजिक न्याय और आरक्षण व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए जातिगत आंकड़े एकत्र करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।

क्या है पूरा मामला?

अंबुमणि रामदास ने कहा कि तमिलनाडु सरकार को राज्य स्तर पर व्यापक जाति आधारित सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण कराना चाहिए। उनका तर्क है कि विभिन्न समुदायों की वास्तविक सामाजिक, शैक्षिक और आर्थिक स्थिति का आकलन किए बिना प्रभावी आरक्षण नीति और कल्याणकारी योजनाएं तैयार करना कठिन है।

उन्होंने मुख्यमंत्री विजय को याद दिलाया कि उनकी पार्टी ने चुनावी घोषणापत्र में भी जाति आधारित जनगणना का समर्थन किया था और अब इसे लागू करने का समय आ गया है।

पीएमके का क्या कहना है?

पीएमके का मानना है कि जाति जनगणना से प्रत्येक समुदाय की आबादी, शिक्षा स्तर, रोजगार, आय, भूमि स्वामित्व और सरकारी सेवाओं में प्रतिनिधित्व की वास्तविक स्थिति सामने आएगी। पार्टी का दावा है कि इससे सामाजिक न्याय से जुड़ी नीतियों को अधिक वैज्ञानिक आधार मिलेगा।

संक्षेप विश्लेषण

जाति आधारित जनगणना का मुद्दा केवल तमिलनाडु तक सीमित नहीं है। हाल के वर्षों में कई राज्यों और राष्ट्रीय स्तर पर भी इसकी मांग तेज हुई है। समर्थकों का तर्क है कि अद्यतन सामाजिक आंकड़ों से कल्याणकारी योजनाओं और आरक्षण नीतियों को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है, जबकि विरोधी पक्ष इसे सामाजिक विभाजन बढ़ाने वाला कदम मानता है।

प्रभाव

  • तमिलनाडु में आरक्षण व्यवस्था पर नई राजनीतिक बहस तेज हो सकती है।
  • विभिन्न समुदायों के सामाजिक-आर्थिक आंकड़े सार्वजनिक होने की संभावना बनेगी।
  • सामाजिक न्याय और पिछड़े वर्गों के प्रतिनिधित्व से जुड़े मुद्दे राजनीतिक केंद्र में आ सकते हैं।
  • अन्य राज्यों में भी जाति आधारित सर्वेक्षण की मांग को बल मिल सकता है।

RI News विश्लेषण

तमिलनाडु लंबे समय से सामाजिक न्याय और आरक्षण की राजनीति का प्रमुख केंद्र रहा है। ऐसे में जाति आधारित जनगणना की मांग केवल प्रशासनिक मुद्दा नहीं बल्कि सामाजिक और राजनीतिक महत्व का विषय है। यदि राज्य सरकार इस दिशा में कदम उठाती है तो इसके प्रभाव तमिलनाडु की राजनीति और नीति निर्माण दोनों पर दिखाई दे सकते हैं।

वास्तविक स्रोत

पीटीआई (PTI), मनीकंट्रोल, डीटी नेक्स्ट तथा अन्य राष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टें।

— RI News राष्ट्रीय डेस्क

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