बैठक ऐसे समय आयोजित हुई है जब पश्चिम एशिया संकट, ईरान-इजराइल तनाव, वैश्विक आर्थिक अस्थिरता और चीन की बढ़ती सामरिक गतिविधियों को लेकर दुनिया भर में चिंताएं बढ़ी हुई हैं। क्वाड देशों ने इस दौरान यह स्पष्ट संदेश देने की कोशिश की कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र को स्वतंत्र, खुला और स्थिर बनाए रखना उनकी साझा प्राथमिकता है।
एस. जयशंकर ने रखी भारत की प्राथमिकताएं
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अपने उद्घाटन संबोधन में कहा कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र केवल सामरिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि वैश्विक आर्थिक विकास के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि आज दुनिया सप्लाई-चेन बाधाओं, कनेक्टिविटी संकट, विनिर्माण संसाधनों की एकाग्रता और बुनियादी ढांचे की कमी जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है। ऐसे में देशों के बीच मजबूत साझेदारी समय की आवश्यकता बन गई है।
जयशंकर ने कहा कि समुद्री लोकतंत्र, बहुलतावादी समाज और बाजार अर्थव्यवस्थाओं के रूप में क्वाड देशों की जिम्मेदारी है कि वे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में स्थिरता और विश्वास को मजबूत करें। उन्होंने समुद्री सुरक्षा, आर्थिक विकल्पों के विस्तार और रणनीतिक सहयोग को आगे बढ़ाने पर बल दिया।
मार्को रुबियो बोले — केवल चर्चा नहीं, कार्रवाई का समय
अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि पिछले एक वर्ष में क्वाड समूह ने खुद को केवल चर्चा के मंच तक सीमित नहीं रखा, बल्कि व्यावहारिक सहयोग की दिशा में तेजी से आगे बढ़ा है। उन्होंने कहा कि चारों देश मिलकर वैश्विक समस्याओं के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
रुबियो ने यह भी कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में क्वाड की प्रासंगिकता और बढ़ गई है। उन्होंने तकनीकी सहयोग, आर्थिक सुरक्षा और सामरिक समन्वय को भविष्य की आवश्यकता बताया।
ऑस्ट्रेलिया ने ‘फ्रीडम ऑफ चॉइस’ पर दिया जोर
ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग ने कहा कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के देशों को सुरक्षा और विकास के मामलों में स्वतंत्र निर्णय लेने की आजादी मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि ऑस्ट्रेलिया क्वाड को ऐसे मंच के रूप में देखता है जो क्षेत्रीय देशों की संप्रभुता और विकल्पों की स्वतंत्रता को मजबूत करता है।
उन्होंने यह भी माना कि वर्तमान समय में वैश्विक रणनीतिक प्रतिस्पर्धा तेजी से बढ़ रही है और आर्थिक दबाव भी लगातार गहरा रहा है। ऐसे में लोकतांत्रिक देशों के बीच सहयोग अत्यंत आवश्यक हो गया है।
क्रिटिकल मिनरल्स और तकनीकी सहयोग पर विशेष चर्चा
बैठक में क्रिटिकल मिनरल्स सप्लाई-चेन को मजबूत करने के मुद्दे पर विशेष फोकस रहा। क्वाड देशों का मानना है कि भविष्य की तकनीक, हरित ऊर्जा और इलेक्ट्रॉनिक उद्योगों के लिए आवश्यक खनिजों की सुरक्षित आपूर्ति वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होगी। जापान ने इस क्षेत्र में भारत के साथ सहयोग को और मजबूत करने की इच्छा जताई।
विशेषज्ञों का मानना है कि चीन पर अत्यधिक निर्भरता कम करने के लिए क्वाड देश वैकल्पिक सप्लाई-चेन तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। यही कारण है कि भारत को इस रणनीति में एक महत्वपूर्ण साझेदार माना जा रहा है।
ईरान संकट और वैश्विक तनाव भी एजेंडे में शामिल
बैठक के दौरान पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ईरान-इजराइल संघर्ष के आर्थिक प्रभावों पर भी चर्चा हुई। ऊर्जा आपूर्ति, समुद्री व्यापार मार्ग और वैश्विक बाजारों पर पड़ने वाले असर को लेकर चारों देशों ने चिंता व्यक्त की।
विश्लेषकों का कहना है कि यदि पश्चिम एशिया संकट और गहराता है तो इसका सीधा प्रभाव तेल की कीमतों, वैश्विक व्यापार और एशियाई अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ सकता है। ऐसे में क्वाड देशों का समन्वय और अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह बैठक?
भारत के लिए यह बैठक कई मायनों में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। एक ओर भारत इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अपनी रणनीतिक भूमिका को मजबूत करना चाहता है, वहीं दूसरी ओर वह तकनीकी, आर्थिक और रक्षा सहयोग को भी नई दिशा देना चाहता है। अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के साथ बढ़ता सहयोग भारत की वैश्विक स्थिति को और मजबूत कर सकता है।
इसके अलावा, सप्लाई-चेन विविधीकरण और क्रिटिकल मिनरल्स क्षेत्र में निवेश से भारत को औद्योगिक और आर्थिक लाभ मिलने की संभावना भी जताई जा रही है।
वैश्विक राजनीति में क्वाड की बढ़ती भूमिका
पिछले कुछ वर्षों में क्वाड को केवल सामरिक मंच नहीं, बल्कि आर्थिक और तकनीकी सहयोग के महत्वपूर्ण समूह के रूप में भी देखा जाने लगा है। समुद्री सुरक्षा, साइबर सुरक्षा, आपदा प्रबंधन, स्वास्थ्य सहयोग और उन्नत तकनीक के क्षेत्र में यह समूह लगातार सक्रिय भूमिका निभा रहा है।
हालांकि, चीन लगातार क्वाड को अपने खिलाफ बन रहे रणनीतिक गठबंधन के रूप में देखता रहा है। बावजूद इसके, क्वाड देश इसे “स्वतंत्र और नियम आधारित इंडो-पैसिफिक व्यवस्था” के समर्थन वाला मंच बताते हैं।
— RI News Desk
स्रोतः आरआई न्यूज फीड नेटवर्क (एकीकृत) | संपादक मंडल: आरआई न्यूज डेस्क (RI News Desk)
📅 प्रकाशित तिथि: 26 May 2026 को 10:04 AM बजे | गाजीपुर, उत्तर प्रदेश



